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समाचार ब्यूरो
22/05/2019  :  09:44 HH:MM
धान की जगह मक्का और अरहर की फसलों को बढ़ाने की योजना
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चंडीगढ़ हरियाणा सरकार प्रदेश में घटते भूजल को लेकर खासी चिंतित है। प्रदेश के कुल 22 जिलों में से नौ जिले डार्क जोन में आ गए है। इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने एक योजना तैयार की है जिसके तहत अति भूजल दोहन वाले क्षेत्रों में धान की फसल के स्थान पर कम पानी वाली फसलें मक्का और अरहर की बुआई को बढ़ावा दिया जाएगा।

धान का क्षेत्र घटाकर इन दो फसलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सात ब्लॉक तैयार किए है। योजना पहले इन सात ब्लॉक में लागू की जायेगी। इस योजना के लिए अभी 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने चुनाव आयोग की अनुमति से मंगलवार को यहां आयोजित पत्रकारवार्ता में इस योजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उपलब्ध भूजल में से 74 फीसदी की निकासी की जा चुकी है। इसलिए 1 लाख 95 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि में से 50 हजार हैक्टेयर भूमि में मक्का और अरहर जैसी कम पानी पर पैदा होने वाली फसलों की बुआई को बढावा देने की योजना लागू की जा रही है। यह 50 हजार हेक्टेयर का ऐसा क्षेत्र है जिसमें बासमती चावल की पैदावार भी नहीं होती है। उन्होंने बताया कि किसानों को इस क्षेत्र में धान की जगह मक्का या
अरहर की बुआई करने पर प्रति एकड़ दो हजार रुपए की दर से मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रीमियम का जो दो फीसदी हिस्सा किसान को देना होता है वह भी सरकार देगी। इस तरह किसान को धान की बुआई छोडऩे पर साढ़े चार
हजार रुपए प्रति एकड़ तक का फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी प्रदेश में मक्का की पैदावार 22 हजार हैक्टेयर में होती है। मक्का का क्षेत्र 50 हजार हैक्टेयर और बढ़ाने की योजना है। मक्का की बुआई से किसान को यह फायदा भी है कि वह अक्टूबर में मक्का
की फसल की कटाई होने पर तुरन्त ही गेंहूं की फसल बो सकेंगे। मक्का की फसल के साथ पराली जैसी समस्या भी नहीं है। इसके अवशेष खेत की मिट्टी में मिलकर इसकी उर्वरा शक्ति भी बढ़ायेंगे। मक्का की बुआई से प्रति हेक्टेयर एक लाख लीटर पानी की बचत होगी। उन्होंने कहा कि अरहर और सोयाबीन की खेती से भी पानी की बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि धान की पौध के रोपण के बजाय सीधी बुआई में भी पानी कम लगता है। पानी की कमी से पैदा हुई चिता के समाधान के लिए किए जा रहे उपायों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 14 हजार तालाबों को माकूल जल संसाधन बनाए रखने के लिए तालाब प्राधिकरण का गठन किया गया है। इसके तहत पहले चरण में तीन हजार तालाबों पर काम किया जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्ब्यिूनल ने राज्य सरकार के इस काम को सराहा है।






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