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समाचार ब्यूरो
09/06/2019  :  12:22 HH:MM
जीत से आगे की इबारत लिखने की तैयारी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार अपने एजेंडे पर काम करने में जुट गई है। प्रचंड बहुमत वाली सरकार के चंद दिनों के कामकाज पर नजर डालिए तो प्रधानमंत्री का स्पष्ट विजन आपके सामने आ जायेगा। भारी बहुमत से मदहोश होने के बजाय मोदी सरकार पहले दिन से अपना मौजूदा आधार मजबूत करने और अपना दायरा बढ़ाने की मुहिम में जुट गई है।

दायरा देश के भीतर कैसे बढ़े और दायरा दुनिया मे कैसे बढ़े ये दोनों एजेंडा आईने की तरह साफ है। जो देखना चाहते हैं उन्हें दिखेगा और जिन्हें लोकसभा चुनाव की तस्वीर धुंधली नजर आ रही थी उनके पास विकल्प है कि वे अपना दृष्टि परीक्षण कराके हो सके तो सही नंबर के चश्मे से इसे पढऩे की कोशिश करें। ये विपक्ष के लिए तो खासतौर पर जरूरी है क्योंकि अगर आप सही तस्वीर नहीं देख पाएंगे तो आपका रास्ता भी साफ नहीं होगा। अब मैं बात करता हूं किस तरह से सरकार अपना दायरा बढ़ाना चाहती है। इसके लिए मैं आपको थोड़ा पीछे ले जाऊंगा फिर आसानी होगी। पिछली सरकार में राममंदिर का मुद्दा भी उठा, तीन तलाक का मसला भी आया लेकिन चुनाव आते आते पुलवामा हो गया। पुलवामा एक अनहोनी थी। कोई भी स्वह्रश्वन में नहीं चाहेगा कि ऐसी घटना हमारी सरजमीं पर घटित हो। हां, सैम पित्रोदा सिख दंगो पर उठे सवाल के जवाब की तरह इसपर भी कह सकते थे हुआ तो हुआ लेकिन आपने क्या किया ये बताओ? जवाब शायद मोदी सरकार ने दिया। जो भी किया जा सकता था किया गया। बालाकोट ऑपेरशन हुआ। अभिनंदन की सकुशल रिहाई
हुई और मोदी के 56 इंच का सीना जो धीरे-धीरे उनके लिए उल्टा पड़ता नजर आ रहा था एक बार फिर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। चुनाव में पाकिस्तान,बालाकोट का मुद्दा मोदी सरकार के लिए बड़ी ताकत बन गया और उनके भरोसे को मजबूत आधार दे गया। देश के हर कोने से बहुमत की सीट में इजाफा हुआ तो तात्कालिक घटनाओं का इसके पीछे बड़ा योगदान था। लेकिन यही अकेला सच नहीं है। अगर हम ये मान लेंगे कि मोदी सरकार केवल, पुलवामा बालाकोट की वजह से दोबारा आई तो आकलन में फिर गड़बड़ हो जाएगी।
ये एक हिस्सा था। मैंने देश के अलग-अलग हिस्सों में घूमकर जो महसूस किया वह साझा करता हंू। 

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देश के विभिन्न राज्यों में करीब 70 लाख नए आवास बने, शौचालय बनाये गए, गरीब महिलाओं को मुफ्त सिलेंडर बांटे गए। जहां बिजली नहीं थी पहुंची और ट्रांसफॉर्मर कम थे या काम के नहीं थे तो बदले और लगाए गए। अधिकारियों ने ये सारे काम टारगेट मोड में किया। जैसे कॉरपोरेट में होता है। मुद्रा, सडक़ों का जाल सहित तमाम अन्य योजनाओं की बात करेंगे तो सरकारी बात ज्यादा लगेगी। लेकिन ये मानना होगा कि हो सकता है कि योजनाएं बहुत नई न रही हों, योजनाओं को नया आकार दिया गया हो लेकिन उनको अमल में लाने का अंदाज नया था। केंद्र से सीधी मोनिटरिंग और गेम चेंजर योजनाओं में स्वयं प्रधानमंत्री की नजर होना सचमुच खेल की दिशा सरकार के पक्ष में बदलने वाला नुस्खा साबित हुआ। जाति कभी भाजपा की राजनीति को सूट नहीं करती। लेकिन जातियों में सेंधमारी, आस्था के अनकहे सवाल, और राष्ट्र स्वाभिमान के मुद्दे के साथ विकास की तमाम योजनाओं का जमीन तक मिशन मोड में पहुंचना ऐसा कॉकटेल तैयार कर गया जिसकी काट विपक्ष नहीं खोज पाया। रोजगार का संकट और कई अन्य खामियों पर ये कॉकटेल भारी पड़ गया। सबसे बड़ी बात सरकार भरोसा कायम करने में कामयाब रही। लोगों को मोदी के नाम, काम और उनकी फौलादी छवि पर भरोसा हो गया। सरकार इकबाल से चलती है और बनती भी इकबाल से है। अब नई सरकार में यही एजेंडा साथ में
रखकर आधार कैसे मजवूत हो दायरा कैसे बढ़े ये सिलसिला शुरू किया गया है। किसानों और असंगठित छेत्र के लोगों को तीन हजार पेंशन किसान सम्मान योजना का एक्सटेंशन और छात्रवृत्ति की घोषणाएं शुरुआत है। अमित शाह को गृह मंत्री बनाकर फिर से वैसा ही कॉकटेल बनाने की कोशिश धारा 370, 35 ए जैसे मुद्दों को जीवंत बनाकर होगी। मोदी विदेश चल पड़े हैं। मालदीव, श्रीलंका जाएंगे। याद रखियेगा चुनाव में बहुत से लोगों का जवाब होता था सरकार ने सरहद मजबूत की है और विदेश में मान बढ़ाया है। विपक्ष जब तक सदमे से सोकर उठेगा सरकार और मोदी - शाह की अगुवाई में पार्टी झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र फतह करने की रणनीति को जमीन पर क्रियान्वित करने में जुट गई गई है। यही मोदी की असली ताकत है। इसके सामने विपक्ष फिलहाल बौना नजर आ रहा है। -जय हिंद






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