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समाचार ब्यूरो
11/06/2019  :  09:26 HH:MM
पंथ के बाद ग्रंथ बेचने का सामने आया खुलासा
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नई दिल्ली 1984 में सेना के द्वारा ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान कब्जे में लिए गए सिख धार्मिक ग्रंथों व साहित्य की वापसी को लेकर सामने आ रहें रोजाना नए खुलासों के कारण सिख सियासत में उबाल आ गया हैं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने सेना द्वारा उस समय सिख रेफरैंस लाइब्रेरी, केंद्रीय सिख संग्रहालय, तोशाखाना,शिरोमणी कमेटी दफ्तर तथा गुरु रामदास लाइब्रेरी से जब्त किए समान की वापसी पर शिरोमणी कमेटी की रहस्यमय चुह्रश्वपी पर आज पत्रकारों से बातचीत करते हुए गंभीर सवाल खड़े किए।

जीके ने आरोप लगाया कि शिरोमणी कमेटी कौम को गुमराह कर रहीं हैं। इसलिए शिरोमणी कमेटी को इस मामले पर तुरंत श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। शिरोमणी अकाली दल पर पंथ का सौदा करने का दोष लगता था पर अब तो ग्रंथ को ही बेचने के तथ्य सामने आ गए हैं। 12 करोड़ में एक हस्तलिखित स्वरूप कमेटी के नुमाईंदों के द्वारा बेचने के मीडिया द्वारा किए गए दावे के बाद जीके ने कहा कि अब सच सामने आना चाहिए। फरवरी 1983 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दमदमी टकसाल के पूर्व प्रमुख संत जरनैल सिंह भिंडरावाले को एक पत्र लिखा था। जिसमें इंदिरा ने संत जी को पंजाब की सभी बुनियादी मांग माने जाने का भरोसा दिया था। इसी पत्र के बाद अकाली नेताओं को इस बात का अहसास हुआ कि यदि सरकार ने संत जी को विश्वास में लेकर पंजाब के हितों की रक्षा कर दी तो उनकी सियासत का क्या होगा। इसके बाद ही संत जी को देशद्रोही साबित करने का कुप्रचार शुरू किया गया, जो कि आखिरकार दरबार साहिब परिसर पर हमले का कारण बना था। हमले के बाद सरकार भी इस दवाब में थी कि यदि संत जी को लिखी चि_ी सिखों के हाथ लग गई तो यह सिखों के पास सरकार के विश्वासघात का अहम् दस्तावेज होगा। इसलिए ही हमले के बाद सरकार ने इसी पत्र को लेकर सिख रेफरैंस लाइब्रेरी व अन्य स्थानों से सारे दस्तावेज जब्त किए थे, ताकि संत जी को लिखा पत्र वापस प्राप्त किया जा सकें। जीके
ने दावा किया कि शिरोमणी कमेटी अभी भी यह बताने की हालात में नहीं हैं कि कमेटी का कितना धार्मिक व साहित्यिक खजाना लूटा गया तथा कितना वापस आया हैं।






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