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समाचार ब्यूरो
11/07/2019  :  09:48 HH:MM
स्मार्ट सिटी करनाल में जल संचयन की दिशा में बढ़ते कदम
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करनाल स्मार्ट सिटी करनाल में जल पुर्नभरण को लेकर शिक्षण संस्थाओं व पार्कों में बनाए गए रेन वाटर हार्वेस्टर से जल संचयन की मुहिम आने वाले दिनो में प्रबल होगी। शहर में इस तरह के उपाय दूसरों को राह दिखाने का काम कर रहे हैं और नागरिक पानी की कीमत तथा इसे बचाने का महत्व समझने लगे हैं। आईय, बात करते हैं रेलवे रोड़ स्थित राजकीय महिला कॉलेज की।
क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद भी यहां बनाए गए दो रेन वाटर हार्वेस्टर सफलतापूर्वक चल रहे हैं। इन्हे तैयार करने के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। वास्तव में बरसात के दौरान थोड़ी सी बारिश से कक्षाओं के समक्ष सारा परिसर पानी से भर जाता था। कई दिन तक चलने वाली बारिश से तो हालात इतने बदत्तर हो जाते थे कि विद्यार्थी और प्राध्यापकों को घुटनों तक भरे पानी में से गुजरकर एक कक्षा से गुजर कर दूसरी कक्षा में जाना पड़ता था, इस समस्या को लेकर सब परेशान थे। फिर एक उपाय समझ में आया और शहर में हाइड्रोलोजिस्ट के कार्यालय से सम्पर्क कर यहां रेन वाटर हार्वेस्टर बनाने का निर्णय लिया गया और परिसर में एक की बजाय दो-दो हार्वेस्टर बना दिए गए। नौ गुणा नौ फुट के आयताकार में बने वाटर हार्वेस्टर अपनी क्षमता के मुताबिक यहां का सारा रेन वाटर अपने अंदर लेकर उसे रिचार्ज कर रहे हैं। इनको तैयार करने से पहले परिसरों का ढलान भी हार्वेस्टरों की तरफ किया गया, ताकि सारा पानी शीघ्रता से इसमें समा सके। हरियाणा तालाब व अपशिष्टï जल प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी ने राजकीय महिला कॉलेज का दौरा किया। कॉलेज की वर्तमान प्राचार्य डॉ. अनुराधा पुनिया ने इस सम्बंध में बताया कि इस महाविद्यालय के बाद ही शहर के दूसरे कॉलेजो में रेन वाटर हार्वेस्टर सिस्टम बने हैं और अभी भी एक दो कॉलेज ऐसे हैं, जहां इस तरह की व्यवस्था नही है। अब तो उन्हे भी अपने यहां रेन वाटर हार्वेस्टर बना लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके ओर भी फायदे हैं, आसमान से गिरने वाला पानी हार्वेस्टर के जरिए जमीन में चला जाता है और कॉलेज में स्वच्छता भी बनी रहती है, जबकि इनके बनाने से पहले कई-कई दिनो तक पानी भरा रहता था, जिसमें बदबू हो जाती थी और गंदे पानी से होने वाली बीमारी का भय बना रहता था। अब अध्यापक और विद्यार्थी दोनों खुश हैं। प्राचार्य के साथ कॉलेज के वरिष्ठï प्राध्यापक सुरेश कुमार, विवेक अत्री तथा नरेश दलाल ने भी हरियाणा तालाब व अपशिष्टï जल प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी की उपस्थिति में कॉलेज में रेन वाटर हार्वेस्टर से पहले की स्थिति बताई और हाइड्रोलोजिकल के अधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया।






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