समाचार ब्यूरो
27/07/2019  :  09:25 HH:MM
‘सक्षम हरियाणा’ योजना कारगर सिद्ध हुई : सीएम
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चंडीगढ़ मुख्यमंत्री मनोहर लाल तथा शिक्षा मंत्री प्रो.राम बिलास शर्मा के राजकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सतत सुधार लाने के विजन व दूरदर्शी सोच को अमलीजामा पहनाने व परिणाम धरातल पर लाने के लिए जुलाई, 2017 में आरम्भ की गई ‘सक्षम हरियाणा’ योजना कारगर सिद्ध हुई है और परिणामसवरुप प्रदेश के 119 खण्डों में से 107 खण्ड सक्षम तथा पांच खण्ड सक्षम-ह्रश्वलस घोषित किए गए हैं।

22 में से 14 जिले भी पूरी तरह सक्षम घोषित किये गए हैं. अब इस योजना को आगे बढ़ाते हुए स्कूलों में सक्षम 2.0 नाम से नया प्रारूप आरम्भ करने का निर्णय लिया गया है। सक्षम हरियाणा कार्यक्रम की नीति आयोग में सराहना की गई और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने राष्ट्रीय अखबारों में हरियाणा की तारीफ़ भी की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित रेड बिशप में आयोजित राज्य स्तरीय ‘सक्षम सम्मान समारोह’ में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि आज का दिन हरियाणा में शिक्षा में गुणवत्ता लाने, अध्यापकों के पढ़ाने के तरीकों में बदलाव लाने, आरम्भ से ही विद्यार्थियों के सीखने के स्तर की नींव मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का एक ऐतिहासिक दिन है। मुख्यमंत्री ने समारोह में सक्षम योजना के सफल क्रियान्वयन में मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम के परियोजना निदेशक तथा स्कूल शिक्षा विभाग के महानिदेशक डॉ. राकेश गुप्ता की पूरी टीम को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब तक हरियाणा का नाम जहां दूध दही का खाना, खेती व पहलवानी, मुक्केबाजी अन्य खेलों के लिए जाना जाता था और शिक्षा के क्षेत्र में विशेषकर सरकारी स्कूलों में कहीं न कहीं पिछड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि सक्षम हरियाणा कार्यक्रम के बाद आरम्भ से ही बच्चों की नींव मजबूत होगी अब तीसरी से आठवी तक की सभी कक्षाओं के अंग्रेजी सहित
मुख्य विषयों को शामिल किया गया है। आने वाले समय में हरियाणा से सरकारी स्कूलों से पास आऊट बच्चों की सक्षम ब्रंाड से होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसा कि जानकारी दी गई है कि अभिभावक प्राइवेट स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में दाखिल करवा
रहे हैं। उच्चतर शिक्षा के लिए हमने पिछले पांच वर्षों में हर 20 किलोमीटर की परिधि में एक सरकारी महाविद्यालय खोला है परन्तु स्कूली शिक्षा की तरफ कम ध्यान दिया गया जिस पर हमने सक्षम कार्यक्रम तैयार किया। उन्होंने कहा कि हलांकि 1996 से ही उसके
दिमाग में अध्यापकों के ऑनलाइन टांसफर करने बात ध्यान में आई थी उस समय में भी शिक्षा मंत्री राम बिलास हुआ करते थे परन्तु उस समय गठबंधन की सरकार थी इस कारण निर्णय लेने में राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव था अब हम पूर्ण बहुमत में थे तो
हमने इसे दृढ़ इच्छा शक्ति से लागू किया।






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