04/08/2019  :  11:02 HH:MM
हंगामा क्यों है बरपा?
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कश्मीर में अफरा-तफरी का माहौल है। आशंका और भय के वातावरण में घाटी के कई हिस्सों में लोग एटीएम पर और राशन की दुकानों पर भीड़ लगाने को मजबरू हएु ह।ंै अमरनाथ यात्रा पिछल े तीस सालो ं म ें पहली बार रोकी गर्इ ह।ै कश्मीर स े लेकर दिल्ली तक सवाल हो रहा है कि आखिर ऐसा क्या होने वाला है।

आतंकी हमलों को रोकने के लिए इतनी बड़ी कवायद समझ से परे है। हजारों की संख्या में सुरक्षा बलों का अतिरिक्त जमावड़ा और यात्रा स्थगित करना ऐसे कदम है जिससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकार कश्मीर में कोई बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्यपाल ने कहा है कि राज्य को कोई जानकारी नहीं है कि धारा 35ए सहित किसी अन्य संवैधानिक मसले पर कुछ होने जा रहा है। सरकार की कार्यशैली में यह उम्मीद करना अनायास होगा कि राज्यपाल को पहले बताकर कुछ किया जाएगा। फिर भी कश्मीर के लोगों का डर कैसे समाप्त हो यह सरकार को अगले कुछ दिनों में साफ करना होगा। केवल कश्मीर में ही क्यों पूरे देश में आशंकाओं का जो माहौल है उस पर विराम लगाना सरकार की जिम्मेदारी है। कहा जा रहा है कि भाजपानीत केंद्र सरकार का एजेंडा लागू होने के अंदेशा की 
वजह से पाकिस्तान की जमीन से घाटी में अस्थिरता फैलाने की साजिश तेज हो गई है। इसके चलते सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की शह पर आतंकी गुट व अलगाववादी ऐसा महौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे कश्मीर में केंद्र का बहुसूत्रीय एजेंडा डिरेल किया जा सके। एक के बाद एक नई एडवाइजरी से अटकलों को बल मिला है। जानकार भी इस स्थिति को अभूतपूर्व बता रहे हैं। कश्मीर की हर पंचायत में १५ अगस्त को झंडा फहराने से लेकर, धारा 35ए, 370 और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार के रुख को लेकर कयास लगाई जा रही है। क्या होगा कहना मुश्किल है लेकिन जिस तरह से सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं वह अभूतपूर्व है। कश्मीर को समझने वालों का कहना है कि या तो सरकार के पास पाकिस्तान की जमीन से किसी बड़ी हरकत को लेकर कोई पुख्ता जानकारी है। या फिर वे कुछ ठोस निर्णय लेने जा रहे हों। लेकिन केवल आतंकी हमलों की सूचना या हथियारों की बरामदगी भर से इस तरह की हलचल नहीं हो सकती। कहा जा रहा है कि कश्मीर में सरकार अपना बहु सूत्रीय एजेंडा लागू करने को
लेकर प्रतिबद्ध है। अनुच्छेद 370 से लेकर 35ए तक पर अमित शाह और मोदी सरकार की दो टूक राय है। लेकिन क्या यह सही समय है जब सरकार ऐसे कदमों पर आगे बढऩे के बारे में सोचे। परिसीमन को लेकर भी अटकलें हैं लेकिन क्या चुनाव के पहले यह संभव होगा। ऐसे तमाम सवाल हैं। जानकारों का कहना है कि यह भी संभव है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से इमरान खान की मुलाकात के बाद पाक एजेंसियां कश्मीर में अस्थिरता फैलाकर फिर से विदेशी दखल की मांग को तूल देना चाहती हों। इसके चलते अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही हो। फिलहाल पूरे देश की निगाह कश्मीर पर है। कश्मीर में शांति, अमन, चैन की दुआ के साथ हमें उम्मीद करना चाहिए कि सरकार बुद्धिमानी भरा फैसला लेगी और उसे बताना होगा कि आखिर यह हंगामा क्यों बरपा है?






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