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समाचार ब्यूरो
09/08/2019  :  10:58 HH:MM
अब प्रदेश के जोहड़ों का होगा सुधारीकरण समौरा गांव के जोहड़ से की शुरुआत
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करनाल हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्र में तालाब जो जोहड़ों के नाम से जाने जाते है, जिनके अब दिन बहुरने लगे है। यह तालाब आज भी प्रदेश के करीब सभी गांवों में विद्यमान है। यही नहीं कभी ये तालाब ग्रामीणों की आस्था के केन्द्र माने जाते थे,जिनकी स्थिति आज काफी खराब दशा में है। जब इसका संज्ञान मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने आया तो उन्होंने तालाब व अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन कर प्रदेश के सभी लगभग 14 हजार तालाबों का सुधारीकरण करने का निर्णय लिया।
करनाल जिले की बात करें तो पहले चरण में इसके कुछ गांवों के तालाबों को लिया गया है। जिनमें सफाई और स्वच्छ जल भरे रहने को प्राथमिकता दी गई है। इन कार्यों के लिए सिंचाई तथा पंचायती राज विभाग को जिम्मा दिया गया है। इसी कड़ी में गुरुवार को करनाल इंद्री रोड पर स्थित समौरा गांव में जल शक्ति अभियान के तहत एक पुराने तालाब की सफाई का कार्य प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी के प्रयासों से शुरू हुआ। जलखुम्बी से अटे पड़े तालाब में सबसे पहले तेजिन्द्र सिंह ने अपने हाथों से जंगली पौधों को उखाड़ कर बाहर निकाला और उसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत जलखुम्बी को उखाडऩे का काम शुरू कर दिया है। सम्पूर्ण रूप से इसकी सफाई में कुछ दिन लगेगे, लेकिन तालाब के स्वरूप को संवारा जाएगा ताकि इसका महत्व गांव की पृष्ठ भूमि से जुड़ा रहे। वैसे भी गांव में पाये जाने वाले मवेशी अधिक्तर तालाबों में ही पानी पीकर अपनी ह्रश्वयास बुझाते है। समौरा गांव में स्थित तालाब की सफाई के साथ, किसानों के लिए सिरदर्द बनी एक समस्या का अंत भी हो जाएगी। वास्तव में इस तालाब में एक जंगली पक्षी का बसेरा रहता है, जो आस-पास के किसानों की फसल को नष्ट कर नुकसान पहुंचाता है। नुकसान करने के बाद वह घनी जलखुम्बी में ही छुप जाता है। जब तालाब की पूर्ण रूप से सफाई हो जाएगी तो यह पक्षी अन्यत्र चले जाएंगे। सफाई को लेकर आस-पास के किसान बहुत खुश है। अब तो वर्षा जल से भरे ओर जलाश्य का रूप ले रहे तालाबों के पानी को खेती में भी प्रयोग करने लगे है। आस-पास के खेतों को तो इनका लाभ ही लाभ है, क्योंकि पानी की कमी के समय तालाब में पाईप से पानी खेतों में दिया जा सकता है। तालाबों को स्वच्छ बनाये रखने के लिए करनाल जिला थ्री व फाईव पौंड सिस्टम को अपनाने वाला प्रदेश का सबसे पहला और अग्रणी जिला बन गया है। कई गांवों ने इस सिस्टम को अपनाकर साईट पर खूबसूरत पार्क भी विकसित कर लिए है, जिससे वे आदर्श गांव कहलाने लगे है। तालाब जो गांवों में पेयजल की बर्बादी से अटकर गंदगी का प्रर्याय बन चुके थे, उनमें पानी को स्वच्छ बनाने के लिए थ्री व फाईव पौंड सिस्टम एक बेहतर विकल्प सिद्ध हुआ है।






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