08/09/2019  :  09:51 HH:MM
चांद से हर हाल में होगा मिलन...
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चंदा मामा से हमारा नाता तो बचपन से है। चंदा मामा दूर होते हुए भी हमारे दिल में रहे हैं। दिल में जो बसा हुआ है उसको हासिल करने की हसरत नई नहीं है। लेकिन हमें उस हसरत को पूरा करने के लिए कुछ त्याग और समर्पण तो दिखाना ही पड़ता है।

इसरो ने त्याग भी किया है और कम खर्चे में दुनिया भर के लिए सबसे महंगी मुराद पूरी करने के लिए पूरा समर्पण भी दिखाया। सपना पूरा होने को था लेकिन हम अपने ह्रश्वयारे चंदा से बस चंद कदम दूरी पर ठिठक गए। क्या पता जी भर कर देख लेने के बाद ही गले मिलने का मौका मिले। लेकिन अब यह तय होगा कि चंद्रमा की चांदनी हमसे लुकाछिपी लंबे समय तक नहीं कर पाएगी। मधुर मिलन की हमारी बेताबी और बढ़ गई है। गले मिलकर गिले शिकवा भी दूर होंगे और चंद्रमा की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास भी होगा। लगे रहो इसरो अभी तो यह शुरुआत है। पूरा देश जिस तरह से चंद्रयान मिशन-2 के साथ खड़ा नजर आया उससे स्पष्ट हो गया है कि न्यू इंडिया की हसरतें नई हैं और वह राष्ट्र के लिए एक साथ एक सुर से बोलने को तत्पर है। शुक्रवार की रात 12 बजे के बाद शनिवार तडक़े करीब एक बजकर 50 मिनट। देश के सवा सौ करोड़ लोगों की सांसे अगले पांच मिनट के लिए थम सी गई थीं। देश के प्रधानमंत्री इसरो मुख्यालय में बैठकर वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ा रहे थे। मिशन में खुद को न्यौछावर करने वाले वैज्ञानिकों के लिए मानो एक नया जीवन
शुरू होने वाला था। पांच मिनट शेष विक्रम लैंडर चांद पर उतरने को बेताब महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर। अचानक सन्नाटा छा गया। पहले से जानकारी थी कि कुछ देर के लिए संपर्क टूटेगा लेकिन ज्यों-ज्यों समय बढ़ रहा था सबकी धडक़न भी बढऩे लगी थी।
सन्नाटा गहरा रहा था। फिर मौजूदा चीफ आये और प्रधानमंत्री की कान में कुछ कहा। संकेत साफ था। लेकिन दिल ने आस नहीं छोड़ी। हम मायूसी टूटने का इंतजार करते रहे। कई बार बिछडऩा मिलने से ज्यादा बेहतरीन एहसास देता है। ये एहसास भी हुआ जब इसरो चीफ आये एलान किया कि हमारा चंद्रयान-2 से संपर्क टूट गया। महज 2 किलोमीटर (2.1) की दूरी पर। बस दो कदम दूर। चांद हमसे अभी मिलने को तैयार न था। लेकिन खूबसूरत एहसास हमसे भला कौन छीन सकता था। हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमारा हौसला कम नहीं हुआ बढ़ गया है। हम होंगे कामयाब एक दिन। इसरो का संकल्प और सवा सौ करोड़ भारतवासियों का भरोसा कामयाब होगा। हम मंजिल हासिल करके रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देर रात तक इसरो मुख्यालय में रहे। सुबह होते ही फिर इसरो पहुंच गए। अपने वैज्ञानिकों
को एहसास दिलाया कि वे अकेले नहीं है। टूटने की जरूरत नहीं है। हमें तो उससे जुडऩा ही है जो हमारे दिल से जुड़ा है। चांद हमारा होकर रहेगा। यह हमारा संकल्प है। -जय हिंद






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