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समाचार ब्यूरो
28/09/2019  :  09:49 HH:MM
ट्रंप की नोबेल की चाह
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अभी कुछ दिन पहले जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में खुद को नोबेल पुरस्कार न मिलने को लेकर नाखुशी जाहिर की थी, तब बहुत से लोगों ने इसे ट्रंप की फितरत से जोडक़र देखा था और कहा था कि ट्रंप इसी तरह की बातें करने के लिए विख्यात हैं। मगर जानकारों का कहना है कि ट्रंप की यह पीड़ा न तो चर्चा में बने रहने के लिए थी और न ही माहौल को हल्का करने के लिए।

ट्रंप वाकई चाहते हैं कि उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया जाए। ट्रंप के अब तक के कार्यकाल को देखें तो पता चलेगा कि उन्होंने न सिर्फ काम करने का एजेंडा सेट किया, बल्कि उसी के मुताबिक चले भी। जहां जरूरत थी वहां भी और जहां जरूरत नहीं थी, वहां भी उन्होंने अपनी टांग फंसाई। नतीजा यह निकला कि कहीं उनकी कोशिशों को सराहा गया तो कहीं खारिज किया गया। अपनी इसी नीतियों के चलते वे विवादित भी कहलाए। नोबेल पुरस्कार पाने की ख्वाहिश पाले ट्रंप को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक सबसे मुफीद समय लग रहा है।  कश्मीर को लेकर पिछले कुछ माह से आ रहे ट्रंप के बयानों ने पटकथा लिखने का काम किया। ट्रंप जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र की बैठक में दुनियाभर के राष्ट प्रमुख आएंगे और उनकी कोशिशों को सराहेंगे। ट्रंप लगातार कश्मीर को लेकर स्टैंड बदल रहे हैं। कभी वे पाकिस्तान के साथ खड़े होते हैं, तो कभी भारत के साथ। तो कभी दोनों को ही नसीहत देने की भूमिका में आ जाते हैं। ट्रंप के अब तक के बयानों को देखें तो जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री उनसे मिलने अमेरिका गए तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता करने की बात की थी, इसलिए वे यह करने को तैयार हैं। विवाद बढ़ा तो अमेरिका में हर स्तर पर ट्रंप का बयान खारिज किया गया। विदेश मंत्रालय को बाकायदा प्रेस कांफ्रें स कर कहना पड़ा कि मोदी ने ट्रंप से इस आशय की कोई बात नहीं की। अब जबकि मोदी संयुक्त राष्ट्र की बैठक में पहुंचे तो ट्रंप कहने लगे कि जब तक भारत तैयार नहीं होगा तब तक वे मध्यस्थता की कोशिश नहीं करेंगे। भारत अकेले ही इस समस्या को सुलझा सकता ह।ै इस बयान को 48 घटं  े भी नही ं हएु थ े कि अब टपं्र फिर स े भारत और  पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दा हल करने की नसीहत देने लगे हैं। नोबेल पाने की ट्रंप की चाह उन्हें सिर्फ कश्मीर लेकर नहीं जा रही। इससे पहले वे उत्तर कोरिया तक भी पहुंच बना चुके हैं। खतरनाक हथियारों की होड़ में जुटे उत्तर कोरिया के शासन किम
जोंग के साथ ट्रंप तीन बार बात कर चुके हैं, मगर अब तक किम की सोच बदल नहीं पाए हैं। इसीलिए वे फिर से भारत और पाकिस्तान को टारगेट करने पर लगे हैं। हालांकि, भारत कह चुका है कि कश्मीर उसका अंदरूनी मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका मंजूर नहीं है। ऐसा नहीं है कि भारत का यह पक्ष पहली बार आया है। समस्या के पहले दिन ेसे भारत मध्यस्थता को खारिज करता रहा है। अब टपं्र इस े मान ें या नही,ं मगर इतना तो तय ह ै कि भारत उनकी बातो ं को तवज्जो नही ं देगा। बेहतर है कि वे पाकिस्तान पर जोर दिखाएं और उसे पीछे हटने को कहें। शायद ऐसा कर ट्रंप नोबेल पाने के हकदार हो जाएं।






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