01/10/2019  :  10:17 HH:MM
आईएमए चंडीगढ़ में हुई सीएमई में 100 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए
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चंडीगढ़ ट्राइसिटी के 100 से अधिक डॉक्टरों ने यहां आईएमए में वल्र्ड हार्ट डे के मौके पर आयोजित एक सीएमई में भाग लिया। सीएमई का आयोजन आईएमए द्वारा ओजस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, पंचकूला के सहयोग से किया गया था। सीएमई में, डॉ. वीरेंद्र सरवाल, हेड, कार्डियोवस्कुलर एंड थोरैसिस, ओजस हॉस्पिटल ने कार्डियक सर्जरी में नए डेवलपमेंट्स के बारे में बात की।

वहीं डॉ. अनुराग शर्मा, डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी ने ‘ट्रीटमेंट ऑफ एओरटिक स्टेनोसिस: ब्रेकिंग द बैरियर टीएवीआर’ के बारे में बात की। डॉ. सरवाल ने कहा कि यह अच्छी तरह से प्रमाणित हो चुका है कि सर्जरी दिल के रोगों के लिए एकमात्र लंबी अवधि तक उपयोगी
रहने वाला समाधान है और ये मरीज की लाइफ को बढ़ाता है। इस प्रकार इसे बिना किसी डर के अधिकांश रोगियों को उपचार की फस्र्ट लाइन के रूप में चुना जाना चाहिए। उन्होंने इन रोगियों को सर्जरी के दौरान कम तनावपूर्ण, कम दर्द, आईसीयू और अस्पताल में कम समय तक रहने और ब्लड प्रोडक्ट्स की कम आवश्यकता के कारण मिनिमल इनवेसिव सर्जरी पर ध्यान केन्द्रित करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इन नए बदलाव के साथ मरीज को अब पारंपरिक सर्जरी के साथ 6-सप्ताह के बजाय 2-सप्ताह के भीतर अपने रोजमर्रा के काम में शामिल होने की सक्षमता मिल जाती है, क्योंकि रोगियों को मिनिमल इनवेसिव सर्जरी के बाद 4 दिनों में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी जाती है। उन्होंने आगे बताया कि ये सर्जरी बाईपास या वाल्व रिह्रश्वलेसमेंट के लिए छाती के बाईं या दाईं ओर छोटे चीरों के माध्यम से की जाती है जो कि लंबाई में मुश्किल से 4-5 इंच के होते हैं। वे विशेष रूप से महिलाओं में काफी उपयोगी साबित होती हैं क्योंकि उनका दिल स्तन और कपड़ों से ढका होता है और रोगियों में कोई मिडलाइन निशान दिखाई नहीं देता है। इसलिए यह रोगी को
बहुत आत्मविश्वास देता है और उन महिलाओं को सोशल तौर पर भी काफी लाभदायक है, जिनकी अभी शादी होनी है। डॉ. अनुराग ने कहा कि कैथेटरबेस्ड डिवाइस के साथ एओरटिक वाल्व को बदलने के लिए टीएवीआई की नई तकनीक फिर से वाल्व के सर्जिकल रिह्रश्वलेसमेंट के लिए तुलनात्मक योग्य नहीं है क्योंकि टीएवीआई 5-8 गुना अधिक महंगी है और इसके सीमित एह्रश्वलीकेशन है और यहां तक कि उनके अनुभव में सर्जिकल रिह्रश्वलेसमेंट के साथ परिणाम इस नई तकनीक से बेहतर हैं।






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