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समाचार ब्यूरो
01/10/2019  :  11:24 HH:MM
जिंदगी के हर पहलू से रूबरू कराते हैं नाटक : महेश वशिष्ठ
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गुरुग्राम हम लोग जिंदगी से कितने कट गये हैं कि हमें यह जिंदगी नाटक सी लगती है। आज के नाटक ने हमें जिंदगी जीने का तरीका सिखाने की कोशिश की है। हर आदमी के अंदर एक बच्चा छिपा होता है और वो बच्चा अपने बचपन के हसीन सपनें याद करके जिंदगी का आंकलन जब करता है तो पता चलता है कि बचपन का कोई सानी नहीं।

यह बात सप्तक कल्चरल सोसायटी के त्रिखा थियेटर अकादमी गुरुग्राम में चल रहे तीन दिवसीय थियेटर फेस्टिवल में बोलते हुये मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी महेश वशिष्ठ ने कही। त्रिखा थियेटर अकादमी के निदेशक विश्वदीपक त्रिखा ने बताया कि सप्तक हर वर्ष रंगमंच के क्षेत्र में दो हस्तियों को एक हरियाणा से और एक राष्ट्रीय स्तर पर नाट्यश्री अवार्ड से सम्मानित करता है। इस वर्ष हरियाणा से सुंदर लाल छाबड़ा को अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। उन्हें यह अवार्ड पिछले साल के अवार्डी महेश वशिष्ठ और पूर्व डीसीपी अनिल धवन ने भेंट किया। उन्होंने बताया कि इस फेस्टिवल के दूसरे दिन एनएसडी के स्नातक सुंदर छाबड़ा द्वारा निर्दिष्ट नाटक वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी का मंचन किया गया। यह नाटक मुंशी प्रेमचंद की दो कहानियों बड़े भाई साहब और चोरी का नाट्य रूपांतरण था। 
नाटक में छोटे भाई अपने बड़े भाई के रिश्ते के बारे में बताते हुये नाटकीय स्थितियों के द्वारा यह बताने में कामयाब हो रहा है कि उसके बड़े भाई साहब हमेशा उस पर हर बात पर गुस्सा किया करते थे, लेकिन जब उस पर कोई विपदा पड़ी तो वो ही सबसे पहले उसके साथ खड़े नजर आये। नाटक यथार्थ पर आधारित मानवीय संबंधों पर आधारित हर घर की कहानी थी। कलाकारों की एनर्जी देखने का लायक थी। मंझे हुये कलाकारों ने अपनी कला का लोहा मनवाया। नाटक का शुभारंभ पूर्व महेश वशिष्ठ, पूर्व डीसीपी अनिल धवन, शिक्षाविद् अर्जुन वशिष्ठ, पूर्व एक्सईएन सीआर बिश्नोई ने दीप प्रज्जवलित करके किया। कलाकारों को वरिष्ठ रंगकर्मी उपासक सुमेर सिंह तंवर, महेश वशिष्ठ, अनिल धवन और आरके यादव ने सम्मानित किया।






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