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समाचार ब्यूरो
13/10/2019  :  10:26 HH:MM
मास्टर स्ट्रोक के मास्टर पीएम मोदी
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महाबल्लीपुरम दो महाबलियों की मुलाकात का गवाह बना। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाह थी। मोदी-जिनपिंग मिले और कूटनीतिक नतीजे भी बेहतर रहे। दोनों अपने अपने नजरिए से इस मुलाकात के फायदे देख सकते हैं।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने घरेलू राजनीति को जो संदेश दिया वह किसी मास्टर स्ट्रोक से कम नहीं है। तमिलनाडु की धरती पर प्रधानमंत्री मोदी जब चीनी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए खड़े थे तो अमूमन पहनने वाले कपड़ों से अलग उनकी वेशभूषा खांटी दक्षिण के परिवेश में रची बसी थी। मोदी आमतौर पर कुर्ता पायजामा या सूट पहनते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने दक्षिण के विशेष परिधान लुंगी को चुना। यानी जिस धरती पर खड़े थे वहां के लोगों को संदेश। उन्होंने तमिलनाडु के परंपरागत तरीके से ही जिनपिंग का स्वागत किया। दक्षिण ऐसा गढ़ है जो पूरे देश में प्रचंड लहर के बाजूद भाजपा के उतना करीब नहीं आ पाया। खासतौर पर तमिलनाडु में भाजपा का नाम लेने वालों की तादाद बेहद सीमित रही है। भाजपा ने जिस तरह से पूरे देश में अपना विस्तार किया अब उनके निशाने पर दक्षिण का यह किला भी है। ऐसे में मोदी का परिधान उनके तमाम मास्टर स्ट्रोक की एक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। पिछले ऐसे कई उदाहरण है जब पीएम मोदी का पहनावा उनका बयान,मिलने का अंदाज और फैसले बड़े मास्टर स्ट्रोक में तब्दील हो गए। उनकी रग - रग में आप सटीक और सधी राजनीति का पाठ पढ़ सकते हैं। जिसका संदेश व्यापक होता है और उसका असर दूरगामी। पीएम मोदी ने जिनपिंग की आवभगत तमिलनाडु की सांस्कृतिक धरा पर किया। भारत और चीन के परंपरागत संबंधों की याद ताजा हुई लेकिन इससे कहीं ज्यादा स्थानीय लोगों से वे जुड़ गए। मेरा मानना है कि पूरे सफल आयोजन के बाद तमिलनाडु में उनके प्रशंसकों की तादाद पहले से काफी बढ़ गई होंगी। केवल तमिलनाडु ही नहीं हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव हो रहा है ऐसे वक्त में मोदी के मास्टर स्ट्रोक की गूंज दूर तक जाएगी। केवल परिधान ही नहीं बल्कि मुलाकात के निष्कर्ष भी पीएम मोदी की सफल कूटनीतिक दांव का संकेत देते हैं। कश्मीर का जिक्र तक न होना और आतंकवाद व कट्टरपंथ पर दोनों नेताओ की साझा चिंता, व्यापार पर नए तंत्र की घोषणा ऐसे कदम है जो साबित करते हैं कि भारत ने जैसी ब्यूह रचना की थी सबकुछ उसके मुताबिक ही हुआ। खासतौर पर कश्मीर को लेकर चीन के रुख पर सबकी निगाह थी। राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे के पहले जिस तरह का बयान आया उसे लेकर भारतीय पक्ष की चिंताए भी थीं। लेकिन अंत में जो नतीजा सामने आया उससे पूरे देश को सुकून मिला होगा और अपनी ताकत पर गर्व भी हुआ होगा। पाकिस्तान के लिए इससे बड़ा झटका नहीं हो सकता था। अब हमें आगे की ओर देखना है इस बातचीत के बाद चीन पुराने कई मौकों की तरह पैंतरेबाजी भी करे तो भी व्यापार और निवेश
के लिए दोनों को आशावादी दृष्टिकोण रखना होगा। हां एक भरोसा सबको है कि पीएम मोदी मास्टर स्ट्रोक के मास्टर हैं और अगर कोई देश भारत को कमतर आंकने का प्रयास करेगा तो भारत दृढ़ता से उसका सामना करने को तैयार है।






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