समाचार ब्यूरो
13/10/2019  :  11:30 HH:MM
भारत में कैंसर दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा
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कुरुक्षेत्र वर्तमान दौर में कैंसर हृदय रोग के बाद सबसे बड़ा हत्यारा बन गया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, कैंसर के कारण हर दिन लगभग 1,300 भारतीय मौत के मुंह में जा रहे हैं। ग्लोबोकैन के अनुसार भारत में अकेले 2018 के दौरान ही कैंसर के 11.6 लाख नए मामले दर्ज किए हैं। एक अनुमान के अनुसार 2040 तक ये आंकड़ा वार्षिक 20 लाख तक पहुंच जाएगा। हरियाणा में ही हर रोज कैंसर से 13 जानें जाती हैं।

डॉ. जतिन सरीन, हेड- ऑन्कोलॉजी, आईवीवाई हॉस्पिटल, मोहाली ने आज कुरुक्षेत्र में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की युवा आबादी और लंबे समय तक तंबाकू का उपयोग कैंसर का मुख्य कारण है। इसके साथ ही ये देश में पुरुषों में कैंसर के 40 प्रतिशत और महिलाओं में 20 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। पुरुषों में शीर्ष तीन कैंसर किलर्स मुंह, पेट और फेफड़ों के कैंसर हैं। वहीं महिलाओं में, सरवीकलए पेट और स्तन कैंसर हैं। भारत में अगले दो दशकों में कैंसर के मामलों में 70 प्रतिशत वृद्धि
होने की उम्मीद है। डॉ. सरीन ने कहा कि हमारे देश में ज्यादातर मामलों का डायग्नोस बहुत देर से किया जाता है और डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को भारत में फेज तीन या चार में पहुंचने पर स्तन कैंसर का डायग्लोस किया जाता है। यह रोगियों के लिए जीवित रहने की दर और उपचार के विकल्पों को काफी प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि भारतीय महिलाओं में मोटापे की बढ़ती उच्च दर आने वाले खतरे को लेकर अलार्म है। उदाहरण के लिए, 2015-16 में किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार हर पांच में से एक महिला मोटापे से ग्रस्त थी। आंध्र प्रदेश, गोवा, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, एनसीटी दिल्ली, चंडीगढ़, पुड्डुचेरी में 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं मोटापे से ग्रस्त थीं। डॉ. जतिन सरीन ने भारत में ह्रश्वलास्टिक के सिंगल यूज पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा हम जो सिंगल यूज ह्रश्वलास्टिक देखते हैं वह नैनो ह्रश्वलास्टिक में परिवर्तित हो जाता है और सेलुलर स्तर पर नुकसान करता है। कोशिकाएं शुरुआत में वास्तव में ह्रश्वलास्टिक को भोजन के तौर पर मान्यता नहीं देती हैंए लेकिन चूंकि वे अपनी ग्रोथ के लिए प्रोटीन पर निर्भर हैं, ऐसे में समय के साथ प्रोटीन नैनो ह्रश्वलास्टिक परत को परत द्वारा अवशोषित करने लगता है क्योंकि कोशिकाओं के लिए ये भोजन के तौर पर सामने आने लगता है। यह धीरे-धीरे कोशिकाओं के अंदर सड़ जाता है और स्टाइरीन नामक एक कम्पोनेंट में परिवर्तित हो जाता है, जो कि एक संभावित कैंसरकारी कम्पोनेंट है।

कैंसर के चेतावनी संकेत

1. मल त्याग या मूत्र संबंधित आदतों में बदलाव
2. गले की खराश जो ठीक नहीं हो रही
3. शरीर में किसी भी उद्घाटन से असामान्य ब्लीडिंग या डिस्चार्ज
4. बिना किसी ठोस कारण के वजन घटना और भूख न लगना
5. कुछ भी निगलने में कठिनाई या पुरानी अपच
6. शरीर में कहीं भी गांठ हो जाना
7. आवाज में लगातार खराश आना या खांसी के साथ आवाज बैठ जाना






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