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16/10/2019  :  10:29 HH:MM
50 सीनियर सिटीजंस ने ‘मीट योअर डॉक्टर्स’ प्रोग्राम में हिस्सा लिया
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गुरुग्राम मोहाली सीनियर सिटिजन एसोसिएशन के 50 से अधिक सदस्य मंगलवार को यहां शैल्बी मल्टी- स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ‘मीट योअर डॉक्टर्स’ प्रोग्राम में शामिल हुए। इस अवसर पर डॉ. नवीन मित्तल और डॉ. मोहित गुप्ता, ऑर्थो सर्जंस, डॉ. अमर भड़ारी, साइकेट्रिस्ट, डॉ. हरप्रीत कौर, डॉ. वंदना और डॉ.श्रेयांस, गाइनोकॉलोजिस्ट, डॉ. नम्रता, हैड, इंटेसिव केयर यूनिट, डॉ. सचिन बिंदल, न्यूरो सर्जन, डॉ. मीतू मेहरा, डिह्रश्वटी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट, डॉ. गुरविंदर धीरज, ईएनटी, डॉ.आकाश गर्ग, इंटर्नल मेडिसन ने अपने संबंधित मेडिकल क्षेत्र में हुए डेवलपमेंट्स के बारे में बताया।

कुलजीत सिंह बेदी, काउंसलर, डॉ. एसएस गिल, क्लीनिकल हेड, सतपाल सिंह गंभीर सीएओ और विशाल मिश्रा हेड-कॉर्पोरेट डेवलपमेंट, शैल्बी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भी उपस्थित थे। नी रिह्रश्वलेसमेंट की जीरो टेक्नीक के बारे में बात करते हुए, डॉ. नवीन मित्तल ने कहा कि इस नई तकनीक में सर्जिकल प्रोसेस में काफी कम समय लगता है। इसके और भी कई लाभ हैं। जीरो टेक्नीक द्वारा जरूरी सर्जरी का समय केवल 8-10 मिनट है और यह सर्जरी के इतिहास में वास्तव में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए
दवाओं के कम से कम सेवन की आवश्यकता होती है, इसलिए दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स की कम खपत से शरीर पर दवाओं के साइड इफैक्ट्स कम होते हैं। इसमें न केवल कम संक्रमण और साइड इफेक्ट होते हैं, बल्कि रक्त भी काफी कम बहता है।
अस्पताल में काफी कम समय रहना पड़ता है और जोखिम भी काफी कम रहता है और मिनिमम एक्सपोजर के साथ तेजी से हीलिंग होती है। इस प्रोसीजर मरीज और उसके परिवार को भावनात्मक और मानसिक तनाव भी कम होता है। डॉ.भंडारी ने बुजुर्गों में मनोरोग संबंधी समस्याओं के बारे में बात करते हुए कहा कि बुजुर्ग विभिन्न मनोरोग विकारों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। 22 से 25 प्रतिशत बुजुर्गों को मनोचिकित्सा विकारों का सामना करना पड़ता है, और यदि उनका उपचार नहीं होता है तो ये वास्तव में घातक साबित हो सकते हैं। सबसे खराब पक्ष ये है कि मनोरोग से पीडि़त अधिकांश लोग नॉलेज की कमी, समस्या के प्रति लापरवाही और मनोरोग से संबंधित सामाजिक सोच के कारण समय पर और सही इलाज नहीं करवा पाते हैं।






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