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20/10/2019  :  11:04 HH:MM
श्रीमदभगवद् गीता की भूमिका पर सेमिनार का आयोजन
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गुरुग्राम विश्वविद्यालय की ओर से शुक्रवार को भगवद् गीता पर सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसका विषय रहा ‘’चिकित्सा के क्षेत्र में भगवद् गीता की भूमिका’’। कार्यक्रम का आयोजन रोहतक में पंडित भगवत दयाल शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेस के सुश्रुता ऑडिटोरियम में किया गया।

एक दिवसीय इस सेमिनार की अध्यक्षता संस्था की ओर से की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पंडित भगवत दयाल शर्मा हेल्थ यूनिवर्सिटी के माननीय कुलपति डॉ. ओपी कालरा, जिओ गीता संस्था के संस्थापक गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज रहे। इस दौरान गुरुग्राम विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ मार्कण्डेय आहूजा जी और कार्यक्रम की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अंजू आहूजा जी मौजूद रही। दीप प्रवज्जलन के बाद शुरू हुए इस कार्यक्रम में डॉ. ओपी कालड़ा जी ने अपने संबोधन में कहा कि वैसे तो हमारा पेशा ही मंदिर के बराबर है हम जब भी किसी मरीज का इलाज करें तो कभी भी हमें फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए, इसी भावना के साथ हेल्थ विश्वविद्यालय को आगे की राह पर लिये चल रहा हूं। इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिये डॉ ओपी कालड़ा जी ने स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का स्वागत किया। वहीं, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. मार्कण्डेय आहूजा जी ने कहा कि उपदेश नहीं उपचार है गीता। मानता का श्रृंगार है गीता। वैसे तो गीता एक किताब नही बल्कि एक इनसाइच है तो आपका मिलन आपकी अंतरआत्मा से करवाती है जब आप ऐसा कर लेते हैं तो आपको जीवन की हर समस्या का समाधान मिल जाता हैफिर चाहे आप किसी भी क्षेत्र में हो, चाहे आप डॉक्टर हो या साइंटिस्ट आपको हर क्षेत्र में तरक्की मिलती जाएगी। आपको अगर कोई रोक सकता है तो वो आपका मन और आपको मन को कंट्रोल करती है भगवद् गीता। जब भी आप भगवद् गीता पढ़ते हैं तो वह आपको आपके जीवन से जुड़ी हर समस्या का समाधान आपको देती जाएगी। इसके बाद डॉ. मार्कण्डेय आहुजा जी ने स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के संबोधन के लिये आग्रह किया। गीता
मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि हमें अपना मनोबल मजबूत करना होगा। आपकी इच्छा प्राप्ति के लिये नहीं बल्कि मानवता के लिये होनी चाहिए। क्षमताओं का विकास, सम्मान और ईश्वरीय प्रशंता कभी आसानी से प्राप्त नहीं कि जा सकती इसके लिये जरूरी है कि आप मेडिटेशन करें जिसके बाद आपको जीवन सब कुछ बड़ी ही आसानी से मिलता चला जाएगा। निश्चित ही आप जीवन के आगे के पथ पर बढ़ते हैं, अध्यात्म को लेकर एक अच्छा जीवन जीयें। महाराज जी ने कार्तिक मास के बारे में बताते हुए कहा कि इसके दोनों छोर काफी मजबूत है पहला सिरा वाल्मीकि जयंती के साथ शुरू होता है जबकि दूसरा सिरा गुरु नानक जी की जयंती पर खत्म होता है, इस महीने में करवा चौथ, अहोई व्रत, भाईदूज, तुलसी पूजा, वनस्पति पूजा, विश्वकर्मा दिवस, धनवन्तरी दिवस, दीवाली, गोवर्धन, गौ माता की पूजा, हनुमान जयंती जैसे अनेकों त्यौहार मनाये जाते हैं, यही भारत का गौरव है और ऐसे महीने में इस कार्यक्रम का होना हमारे लिये सौभाग्य है। वहीं एक दिसंबर को लाल किला पर गीता प्रेरणा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है जिसका जिक्र स्वामी ज्ञानानंद जी
महाराज ने मंच से किया। कार्यक्रम में एसजीटी विश्वविद्यालय से प्रो चांसलर डॉ श्याम लाल सिंगला जी, यूएसएस के रजिस्ट्रार डॉ एच. के. अग्रवाल, पीजीआईएमएस रोहतक के डायरेक्टर डॉ रोहताश यादव, डॉ अरुण नरूला, डॉ रवि गुगनानी, डॉ नमिता कालड़ा, डॉ प्रवीण मल्होत्रा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। वहीं ऑडिटोरियम में एक हजार से ज्यादा लोग मौजूद रहे।






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