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समाचार ब्यूरो
23/10/2019  :  09:10 HH:MM
आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में चिदंबरम को दी जमानत लेकिन एक अन्य मामले में अभी रहना होगा जेल में
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नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को मंगलवार को जमानत दे दी। सीबीआई की ओर से दर्ज इस मामले में गिरफ्तार किए जाने के दो महीने बाद चिदंबरम को यह राहत मिली है लेकिन उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय ने एक अन्य मामले में पहले ही उन्हें गिरफ्तार किया है। न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने चिदंबरम को जमानत प्रदान करते हुये दिल्ली उच्च न्यायालय का 30 सितंबर का फैसला निरस्त कर दिया।

उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के इस मामले में चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विशेष अदालत में एक लाख रूपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानती देने पर चिदंबरम को रिहा कर दिया जाये।
न्यायालय ने सीबीआई की इस दलील को दरकिनार कर दिया कि 74 वर्षीय चिदंबरम ने इस मामले में दो प्रमुख गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया था। न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई विवरण उपलब्ध नहीं है कि ‘कब, कहां और कैसे इन गवाहों से संपर्क किया गया।’’ तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री को जमानत मिलने के बाद भी अभी छूट नहीं सकेंगे क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय ने आईएनएक्स मीडिया घोटाले से संबंधित धन शोधन के मामले में उन्हें पहले ही हिरासत में ले लिया है। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामले में चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। जांच ब्यूरो ने यह मामला 15 मई, 2017 को दर्ज किया था। यह मामला 2007 मे वित्त मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा आईएनएक्स मीडिया को 305 का विदेशी निवेश प्राप्त करने की मंजूरी में हुयी कथित अनियमित्ताओं से संबंधित है। सीबीआई द्वारा प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद ही प्रवर्तन निदेशालय ने भी धन शोधन का मामला दर्ज किया था। पीठ ने कहा कि जांच ब्यूरो के अनुसार चिदंबरम ने गवाहों को प्रभावित किया और आगे भी प्रभावित किये जाने की संभावना पूर्व वित्त मंत्री को जमानत से इंकार करने का आधार नहीं हो सकता जबकि निचली अदालत में उनकी हिरासत के लिये दाखिल छह आवेदनों में कहीं भी इस तरह की सुगबुगाहट तक नहीं है। पीठ ने चिदंबरम को कुछ शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।






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