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23/10/2019  :  11:25 HH:MM
पाकिस्तान का परमाणु युद्ध की गीदड़ भभकी
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कश्मीर में धारा 370 हटाये जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की हरसंभव कोशिशें की। हालांकि पाकिस्तान को एक-दो छोटे देशों को छोडक़र किसी शक्तिशाली देश का साथ और समर्थन इस मुद्दे पर नहीं मिला। यहां तक कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने भी भारत का रूख देखते हुए इस मामले में अलग-थलग रहने में ही भलाई समझी। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान पर बेचैनी इस कदर हावी हो चुकी है पाक के मंत्री और सेना के अधिकारी गाहे-बगाहे परमाणु युद्ध होने की धमकी तक देने लगे हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, मंत्री से लेकर सेनाध्यक्ष और कई मंत्री तक भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दे चुके हैं। इमरान खान ने तो हाल में ही हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत को परमाणु युद्ध की गीदड़ भभकी दी थी। प्रकाशित साइंस एडवांस के एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इससे सूर्य के प्रकाश में 20 से 35 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। जिससे धरती का तापमान दो से पांच डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है। इससे धरती पर हिमयुग आ सकता है। ताजा घटनाक्रम में पाकिस्तान सीजफायर का खुले तौर
पर उल्लंघन कर रही है। भारत भी पाक सेना को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। इस बीच पाक के रेल मंत्री ने एक बार फिर परमाणु युद्ध वाला बयान दिया है। असल में परमाणु युद्ध के बारे में किसी न किसी मंच से पाकिस्तान के हुक्मरान बार बार दोहराते रहते हैं। यही तर्क परोक्ष तौर पर इस बात को साबित करता है कि पाकिस्तान भी अंदर से इस बात कोमानता है कि सामने की लड़ाई में वह भारत से कभी जीत नहीं पायेगा। लेकिन विश्व की अन्य शक्तियां उसकी अपनी मजबूरियों का फायदा उठाकर उसे भारत के सामने तने रहने पर विवश करती हैं। अब नये सिरे से पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने फिर से इसी परमाणु युद्ध की बात कही है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ इस बार पारंपरिक युद्ध नहीं होगा। रशीद ने कहा कि अब कि बार चार-छह दिन तोपें नहीं चलेगी, हवाई हमले या नेवी के गोले नहीं चलेंगे। पाकिस्तान ने भारत का नाम लिए बगैर जंग की धमकी दी है। सीधे परमाणु परमाण युद्ध होगा। पाकिस्तान का बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तानी सेना ने अपनी तोपों को एलओसी के करीब तैनात करने का काम शुरू कर दिया है। टैंकों को भी सीमा की तरफ बढ़ाया जा रहा है। इतना ही नहीं, उसने एलओसी पर अपने जवानों की संख्या को भी बढ़ा दिया है। इसलिए वह किसी बड़ी नापाक हरकत करने की तैयारी में जुट गए हैं। एक आकलन है कि अगर वाकई ऐसा हा तो इस युद्ध में करीब साढ़े बारह करोड़ लोग यूं ही एक झटके
में मारे जाएंगे। एयर ब्लास्ट-1 के बाद 3.21 किलोमीटर तक झटके महसूस होंगे। 10.5 किलोमीटर तक रेडिएशन फैलेगा। 50-90: लोग प्रभाव में आएंगे। एयर ब्लास्ट-2 में 14.2 किलोमीटर तक इमारतें ध्वस्त हो जाएंगी। 47.9 किलोमीटर तक थर्मल रेडिएशन का असर होगा। एयर ब्लास्ट-3 के बाद 93.7 किलोमीटर तक खिड़कियों के शीशे टूट सकते हैं। 100 किलोमीटर के दायरे तक तबाही मचेगी।

परमाणु बम को खराब इसलिए माना जाता है कि सिर्फ विस्फोट होने तक इसका असर समाप्त नहीं होता है। वहीं इससे निकले विकिरण से एक दशक तक वैश्विक वायुमंडलीय तबाही जारी रहेगी। पूरी दुनिया पर इसका जो प्रभाव होगा, वह पृथ्वी पर तबाही ला सकता है, इस बात को समझने और समझाने की जरूरत है। न्यूक्लियर हमले से जलवायु एकदम बदल जाएगी। दो अरब लोगों के भूखे मरने की नौबत आ सकती है. फिजिशियंस की एक ग्लोबल संस्था ने ये बात 2013 में कही। इस संस्था का नाम है इंटरनेशनल फिजिशियंस फॉर प्रिवेंशन ऑफ न्यूक्लियर वॉर। पृथ्वी पर हिमयुग तक पैदा कर सकता है यह युद्ध हालांकि भारतीय विशेषज्ञों ने इस तरह के संघर्ष की संभावना से इनकार किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु युद्ध के हालात में अगर भारत और पाकिस्तान अपने पूरे परमाणु
जखीरे का प्रयोग करते हैं तो इनके विस्फोटों से पैदा हुई आग और धुआं 16 से 36 मिलियन टन कालिख छोड़ सकता है। यह कालिख पूरे वातावरण में फैल सकती है जिसके गंभीर परिणाम होंगे। ऐसा माना जाता है कि भारत के पास कुल 110 और पाकिस्तान के पास 130 परमाणु हथियार हैं। हालांकि, पाकिस्तान तेजी से अपनी परमाणु हथियारों की क्षमता को बढ़ा रहा है। वैज्ञानिक पहले ही इस संभावित खतरे का पूरा विश्लेषण कर यह बता चुके हैं कि जिन देशों को भारत और पाकिस्तान के युद्ध से कुछ लेना देना नहीं है, वे भी इससे अप्रभावित नहीं रह पायेंगे। हम सभी हिरोशिमा और नगासाकी के अणु बम विस्फोट की तस्वीरों और वीडियो को देख चुके हैं। रिसर्चर्स के मुताबिक, अगर दोनों तरफ से मिलाकर 100 बम इस्तेमाल किए गए तो 2.1 करोड़ लोग पहले हफ्ते में ही मर जाएंगे। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल इंडियास्पेंड के डेटा के मुताबिक, ये आंकड़ा 2006 से 2015 के बीच आतंकवाद से भारत में हुई कैजुअलटीज से 2221 गुना होगा। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के 66 परसेंट न्यूक्लियर बम बैलिस्टिक मिसाइल में लगाकर रखे गए हैं। भारत को ध्यान में रखकर ही पाकिस्तान ने ‘हत्फ’ नाम की बैलिस्टिक मिसाइल सीरीज डेवलप की है, और कर रहा है। आप सोचिए कि इस दौर में युद्ध की कोई सीमा होगी? क्या दो परमाणु बम-संपन्न पड़ोसी देश युद्ध का खतरा उठा सकते हैं? भारत और पाकिस्तान दोनों के पास न्यूक्लियर हथियार को ले जाने वाले मिसाइल हैं। खास बात यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के आखिरी कोने तक हमले की क्षमता वाले मिसाइल विकसित कर चुके हैं। भारत के पास तो 5000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल है, जो पाकिस्तान के बाहर भी हमला करने की क्षमता रखती है। पाकिस्तान के पास भी न्यूक्लियर हथियार ले जाने वाले मिसाइल है, जो 2,750 किलोमीटर तक लक्ष्य साध सकता है।

विश्व परिदृश्य की बात करें तो शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियारों के जखीरे में कमी आई है लेकिन आज भी दुनिया के कई देशों के पास हजारों की संख्या में ये हथियार हैं। रूस के पास अभी 6,500 परमाणु हथियार हैं। इसी तरह अमेरिका के पास 6,185 हथियार हैं। फ्र ांस के पास 300, चीन के पास 290, ब्रिटेन के पास 215, इजरायल के पास 80, पाकिस्तान के पास 140-150, भारत के पास 130-140 और उत्तर कोरिया के पास 20-30 परमाणु हथियार का अनुमान है।यह अच्छी बात है कि पाकिस्तान में भी इस किस्म की बेतूकी बातों की अब आलोचना होने लगी है। फिर भी यह पूरी दुनिया के लिए विचार का विषय है कि परमाणु हथियार की शक्ति से लैस देश के नेता अगर बार बार इस किस्म का बयान देते हैं, तो उसकी गंभीरता कितनी है। इस बात को वैज्ञानिक और समझदार लोग अच्छी 
तरह समझते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान पूरी तरह और भारत भी काफी हद तक तबाह हो जाएगा। लेकिन बात यहीं समाप्त नहीं होगी। ऐसे में पूरी दुनिया की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह पाकिस्तान के हुक्मरानों को यह समझाये कि आर्थिक बदहाली के दौर में परमाणु बम के बदले अपनी जनता की भलाई के बारे में गंभीरता पूर्वक सोचें।






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