हरियाणा मेल ब्यूरो
03/04/2017  :  09:56 HH:MM
संस्कृति और सभ्यता हमारी सबसे बड़ी पहचान : सोलंकी
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास करने वाले मानव रचना एजुकेनल इंस्टीच्यूशंस (एमआरईआई) के अपने दूरदर्शी संस्थापक डॉ. ओ पी भल्ला की विरासत को आगे ले जाने के उद्देष्य से स्थापित मानव रचना एक्सीलेंस अवार्ड 2017 विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता के प्रतीक माने जाने वाले पांच दिग्गजों को प्रदान किए गए।

यह समारोह ‘‘शिक्षा की स्वायत्तता पर राष्ट्रीय सम्मेलन’’ के अंतिम दिन आयोजित किया। मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने मानव रचना एडुकेषनल इंस्टीच्यूट्स के अध्यक्ष डॉ. प्रशंत भल्ला तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी के साथ इन दिग्गजों को ये पुरस्कार प्रदान किए। इस मौके पर अन्य हस्तियों के साथ एमआरईआई के उपाध्यक्ष डॉ. अमित भल्ला तथा पदम्श्री प्रीतम सिंह उपस्थित थे।

पांच दिग्गज जिन्हें पुरस्कार से नवाजा गया

पांच दिग्गजों में राजन नंदा,अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एस्कॉट्र्स ग्रुप (जिन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया), आरसी भार्गव, अध्यक्ष, मारुति सुजुकी (राष्ट्रीय निर्माण के लिए); दिनेश कुमार सर्राफ, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, ओएनजीसी (कॉर्पोरेट और उद्योग के लिए); सुश्री श्रद्धा सूरी, एमडी, सुब्रोस ग्रुप (युवा नेत्री के लिए) और पीवी सिंधु, बैडमिंटन) शामिल हैं। मानव रचना शैक्षिक संस्थान के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत भल्ला ने कहा, ‘हमारे संस्थापक पिता डॉ. ओ. पी. भल्ला ने बेहतर मनुष्य बनाने के उद्देष्य के साथ ‘मानव की रचना’ की। आज आयोजित इस अभूतपूर्व आयोजन के माध्यम से, हम अदम्य भावना, अद्भुत व्यक्तित्व और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की व्यापक दृष्टि को पहचानने पर गर्व महसूस करते हैं। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राश्ट्र निर्माण के दर्शन को ध्यान में रखते हुए, एमआरईए 2017 युवाओं को देश को उस ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रेरित करेगी जितनी उंचाई पर पहले कभी देखा नहीं गया था।’एमआरईआई के एमडी, डॉ संजय श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ‘द टाइमलेस विजडम फ्राम गीता एंड द आर्ट ऑफ लीडरशिप’ पुस्तक के विमोचन के दौरान भी उन्होंने भगवद गीता के गुणों के बारे में बताया। इससे पहले, सम्मेलन के पहले दिन, हरियाणा के शिक्षा मंत्री माननीय राम विलास शर्मा ने शिक्षा पर अपने दर्षन पर यह कहते हुए दशकों को मंत्रमुग्ध कर दिया कि ‘‘शिक्षण भारत में कभी पेशा नहीं रहा बल्कि यह समर्पण और जीवन का एक तरीका रहा है। 19 वीं शताब्दी यूरोप का और 20 वीं शताब्दी अमेरिका का थी लेकिन 21 वीं शताब्दी भारत की है जो निश्चित रूप से महानता के मार्ग पर है।’’





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