समाचार ब्यूरो
03/04/2017  :  10:50 HH:MM
मीट की आड़ में मौत !
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बूचडख़ानों पर तालाबंदी, यानी गोश्तबंदी, को लेकर बाजार बंद हैं। हड़ताल जारी है। कुछ दुकानें खुद बंद हैं, तो कुछ भय, खौफ के कारण बंद हैं। अब यह मुद्दा उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहा है। अन्य पांच राज्यों में भी अवैध बूचडख़ानों पर तालाबंदी के आदेश जारी हो गए हैं। यह मुद्दा संसद में भी गूंजा।

अब इसके समीकरण बदल गए हैं। मुसलमानों का एक तबका इसे रोजी-रोटी से जोड़ कर प्रस्तुत कर रहा है। हरियाणा के गुरुग्राम में शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने केएफसी समेत मीट की करीब 500 दुकानें बंद कराईं। दरअसल बूचडख़ानों पर तालाबंदी का भाजपाई मकसद भिन्न था। जो हिंदूवादी हैं, गोरक्षक हैं और सबसे बढक़र मीट की आड़ में मौत बेची जाती रही है, तो ऐसी गोश्तबंदी क्यों न कराई जाए? कुछ जबरन कार्रवाई, कुछ नई सत्ता का भय और खौफ, कुछ के पास लाइसेंस नहीं है, तो व्यापक स्तर पर यह मीटबंदी इसलिए भी जरूरी थी, क्योंकि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश भी थे। गाय, भैंस के नाम पर कुत्ते, बकरे
या किसी अन्य पशु का मीट बाजार में बेचा जा रहा था। उस पर कोई छंटनी, कोई लगाम या निगरानी थी क्या? पिछली सरकारों ने धर्मनिरपेक्षता और मुस्लिम वोट बैंक के नाम पर बूचडख़ानों के भीतर की हकीकतें झांक कर नहीं देखी थीं। चूंकि नए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी बुनियादी तौर पर एक संत, महंत, संन्यासी और मानवतावादी हैं, उनके संकल्पों में शामिल है अवैध बूचडख़ानों का मुद्दा, मुख्यमंत्री गोश्त कारोबार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सब कुछ कानूनन चलेगा। गोश्त के पुराने व्यापारी अदालत की चौखट पर जाने और इसे एक खास तबके की रोजीरोटी से जोडऩे के बजाय अपने लाइसेंस नए कराएं। उन्हें कानूनसम्मत बनाएं। राज्य में हड़ताल करने या इसे हिंदू-मुसलमान का मुद्दा बनाने से उन्हें ‘इनसाफ’ भी हासिल नहीं होगा। उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और विशेष तौर पर झारखंड सरकारों ने भी अवैध बूचडख़ानों को बंद करने के आदेश दे दिए हैं। संयोग से ये सभी राज्य सरकारें भाजपा शासित हैं। क्या गोश्तबंदी को भी भाजपा बनाम गैर-भाजपा मुद्दा बनाने की कवायदें जारी हैं? जो लोग जबरन बूचडख़ानों को बंद करा रहे हैं या मुद्रित धमकियां बांट रहे हैं, वे भी न तो भाजपा प्रतिनिधि हैं और न ही भाजपा की नई ‘गुंडई नस्ल’ हैं। यह सिर्फ एक अवैध कारोबार के शुद्धिकरण की प्रशासनिक कोशिश है, जिसके लिए जनता ने जनादेश दिया है। दिल्ली की बगल में उत्तर प्रदेश का एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक शहर है-नोएडा। वहां मुसलमानों की भी आबादी पर्याप्त है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के पांच दिन बाद ही नोएडा के तमाम बूचडख़ाने बंद हो गए। बेशक वे गाय, भैंस, बैल के मांस का कारोबार करते थे या बकरा, मुर्गा
बगैरह काटते थे। सभी दहशत में हैं और बूचडख़ानों पर खुद ही ताले लगा दिए हैं। उनमें कुछ मुसलमान शिकवे के अंदाज में बोले-‘योगी सरकार एक खास तबके को निशाना बना रही है। हमारी रोजी-रोटी पर हमला किया जा रहा है, लेकिन अब क्या किया जा सकता है।’ दरअसल उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश बनाना, उत्तर प्रदेश को संवारना-सुधारना, अपराधियों को राज्य के बाहर खदेडऩा और पूरी व्यवस्था को आमूल बदलना भाजपा, प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की साझा प्रतिबद्धता है। योगी ने मात्र सात दिनों में ही 17 फैसले किए हैं और उन्हें सख्ती से लागू किया जा रहा है।






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