हरियाणा मेल ब्यूरो
05/04/2017  :  10:41 HH:MM
जस्टिस के ‘दिल की बात’
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मुद्दे वही, लेकिन अंदाज अलग था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने न्यायपालिका की समस्याओं को रखते हुए पूर्व प्रधान न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर भावुक हो गए थे। लेकिन जस्टिस जेएस खेहर मजबूती से बोले। मौका इलाहाबाद हाई कोर्ट की 150वीं वर्षगांठ का था। जस्टिस खेहर ने कहा- ‘प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं, तो देश सुनता है। वे अब मुझे अपने दिल की बात करने दें।’ फिर जजों की कमी और अदालतों पर काम के भारी बोझ के सवाल उन्होंने उठाए। जस्टिस खेहर तैयारी से आए थे।
पिछले हफ्ते उन्होंने एलान किया था कि इस बार गृष्मावकाश में सुप्रीम कोर्ट की तीन संविधान पीठ बैठेंगी। यानी कोर्ट के कुल 19 जज छुट्टी नहीं लेंगे। इस तरह जस्टिस खेहर ने इस आलोचना का जवाब तैयार किया कि जज मुकदमों को शीघ्र निपटाने के लिए फिक्रमंद नहीं हैँ। इसके बाद अधिक नैतिक बल के साथ उन्होंने न्यायपालिका की समस्याओं पर बात की। एक सार्वजनिक समारोह में सरकार और न्यायपालिका के टकराव का समाधान निकल आएगा, यह अपेक्षा तो किसी को नहीं होगी। लेकिन जैसी पहल सुप्रीम कोर्ट के जजों ने की है, उसी के अनुरूप सरकार भी कदम उठाए- तो बेशक न्यायिक प्रक्रिया को लेट-लतीफी से निकालने की शुरुआत संभव है। इस बार गर्मी की छुट्टियों में तीन संविधान पीठ सार्वजनिक महत्त्व के तीन मामलों की सुनवाई करेंगी। जस्टिस खेबर ने कहा था कि ऐसा नहीं हुआ, तो ये मामले वर्षों तक लटके रहेंगे। इस तरह जस्टिस खेहर ने ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ की परंपरा तोडऩे का प्रयत्न किया। ये सुझाव पुराना है कि न्यायालयों में अवकाश के दिन घटाए जाएं। या फिर कई जज अवकाश के दौरान भी काम करें। मगर अतीत में इस पर अमल की कभी ठोस पहल नहीं हुई। जस्टिस खेहर की ताजा पेशकश पर भी कुछ हलकों से आशंकाएं जताई गई हैं। कहा गया है कि इसमें व्यावहारिक दिक्कतें आएंगी। लेकिन आशा की जानी चाहिए कि उनका समाधान ढूंढ लिया जाएगा। जिन मामलों की सुनवाई होगी उनमें एक तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-पत्नी जैसी मुस्लिम प्रथाओं की संवैधानिक वैधता से संबंधित है। इसके अलावा नागरिकता कानून की धारा 6-ए की वैधता पर भी छुट्टियों के दौरान सुनवाई होगी। एक अन्य संविधान पीठ आधार कार्ड योजना और संभवत:  सोशल मीडिया एह्रश्वलीकेशन ह्वाट्सऐप द्वारा अपने यूजर्स की निजता के हनन के आरोपों पर सुनवाई करेगी। आशा है, ये शुरुआत निरंतरता प्राप्त करेगी। सरकार को इसमें मददगार बनना चाहिए।






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