हरियाणा मेल ब्यूरो
07/04/2017  :  11:22 HH:MM
योगी ने वादा निभाया
Total View  44

किसानों के कर्ज माफ कर देगी। तो योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल ने अपनी पहली बैठक में ये फैसला ले लिया। विपक्ष ने इसे अधूरा, लेकिन सही दिशा में कदम बताया है। उसके पास कोई चारा भी नहीं है। आखिर किसानों की कर्ज माफी का वादा लगभग सभी दलों ने किया था। इसलिए सिद्धांतत: इस पर सवाल उठाने का नैतिक बल उनके पास नहीं है। तो उन्होंने यही आलोचना की है कि राज्य में दो करोड़ 33 लाख किसान हैं, लेकिन योगी सरकार के फैसले का लाभ 86 लाख किसानों को ही मिलेगा। वजह राज्य सरकार का सिर्फ फसल कर्ज माफ करने का निर्णय है।

यानी किसानों के सावधि ऋण माफ नहीं होंगे। फिर अधिकतम एक लाख रुपए तक का कर्ज ही माफ होगा। लेकिन ये इस मामले से जुड़े बुनियादी सवाल नहीं हैं। प्रश्न यह है कि क्या कर्ज माफी सही रास्ता है? ध्यानार्थ है कि मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से किसानों के कर्ज माफ करने को कहा है। उधर उत्तर प्रदेश के 
फैसले को देखते हुए महाराष्ट्र और हरियाणा में भी ये मांग उठ खड़ी हुई है। जबकि भारतीय स्टेट बैंक की प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि कर्ज माफी बैंकिंग व्यवस्था को लडख़ड़ा देगी। तब दलील दी गई कि जब सरकारी बैंक बड़े उद्योगपतियों के लिए लगभग 10 लाख करोड़ रुपए का कर्ज
वसूलने में अक्षम हैं, तो फिर किसानों के कर्ज को लेकर हाय-तौबा क्यों मचाई जाती है? ऐसे तर्कों का कोई अंत नहीं होता। मगर बात यही कही जानी चाहिए कि किसी का भी कर्ज माफ नहीं होना चाहिए। इससे गलत परंपरा पड़ती है। क्या आज उत्तर प्रदेश के वे किसान ठगे गए नहीं महसूस कर रहे होंगे, जिन्होंने समय पर कर्ज
चुका दिया? सामूहिक माफी का संदेश होता है कि ऋण लेकर बैठे रहो- कभी कोई सरकार आएगी जो माफ कर देगी। फिर वर्तमान कर्ज माफी से किसानों को फ़ौरी राहत ही मिलेगी। वह भी उनको जिन्होंने फसल, बीज, खाद आदि के लिए ऋण लिया था। मगर इससे कृषि को खड़ा और संकट मुक्त करने का रास्ता नहीं निकलेगा। यानी यह ऐसा मरहम है, जिससे रोग का इलाज नहीं होगा। मगर तोहफे बांट कर वोट जुटाने के इस दौर में व्यवस्थागत एवं गंभीर मुद्दों पर ध्यान देने की फिक्र किसे है?





----------------------------------------------------

Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   6271057
 
     
Related Links :-
मौलिक या कानूनी अधिकार?
प्रशासनिक सुधार की जरूरत
इस घुसपैठ का क्या करें?
अब अमल की करें गारंटी
कैसे होंगी सडक़ें सुरक्षित?
अमेरिका का अजीब खेल
कोविंद के स्वागत के लिए तैयार रायसीना हिल!
कब तक गिनेंगे नोट?
कभी गरीबों का भोजन रहा बाटी चोखा, अब शाही भोजन की पहचान
सुधार का सही मौका
 
http://buypropeciaonlinecheap.com/