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समाचार ब्यूरो
07/04/2017  :  11:24 HH:MM
धूम्रपान से मौतों के मामले में भारत शीर्ष चार देशों मे
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विश्व में धूम्रपान से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है और भारत विश्व के उन चार शीर्ष देशों में है जहां इस वजह से सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है। मेडिकल जर्नल‘द लांसेट’में हाल में प्रकाशित ग्लोवल वर्डन ऑफ डिजीज(जीबीडी) रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में हर दस मौतों में से एक मौत धूम्रपान की वजह से हुयी और इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक मौतें केवल चार देशों में हुयी है जिनमें भारत भी शामिल है।

विश्व में 2015 में हुई 64 लाख मौतों में 11 प्रतिशत मौतें धूम्रपान की वजह से हुयी है जिनमें से 52.2 प्रतिशत चीन,भारत,अमेरिका और रूस में हुयी है। अध्ययन के अनुसार 2015 में चीन,भारत और इंडोनेशिया में धूम्रपान करने वाले पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा है और यह पूरे विश्व में धूम्रपान करने वालों का 51.4 प्रतिशत है। भारत में धूम्रपान करने वाले पुरुषों का प्रतिशत विश्व का 11.2 है। अध्ययन से यह एक अच्छी बात सामने आयी है कि 1990 के 29.4 प्रतिशत की तुलना में 2015 में धूम्रपान के प्रसार में कमी आयी है और यह 15.3 प्रतिशत रह गया है। वर्तमान समय में चार में से एक पुरुष और 20 में से एक महिला धूम्रपान करती है। धूम्रपान करने वालों का प्रसार भले ही घटा हो लेकिन विश्व की आबादी बढऩे के कारण धूम्रपान करने वालों की संख्या बढ़ी है। विश्व मे 1990 में धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या 87 करोड़ चालीस लाख से बढक़र 2015 में 93 करोड़ 31 लाख हो गयी है।

महिलाओं की बात की जाये तो धूम्रपान करने के मामले में अमेरिका,चीन और भारत की महिलाएं सबसे आगे हैं। विश्व में धूम्रपान करने वाली कुल महिलाओं में से 27.3 प्रतिशत महिलाएं इन देशों की हैं।अध्ययन के अनुसार 2015 में 2005 के मुकाबले धूम्रपान से मरने वाले लोगों की संख्या 4.7 प्रतिशत बढ़ी है और इसे स्वास्थ्य के बड़े खतरे के रूप में देखा जाने लगा है तथा विकलांगता का भी दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाने लगा है। यह अध्ययन वर्ष 1990 से 2015 तक के बीच 195 देशों के लोगों की धूम्रपान की लत के आधार पर किया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि उम्रदराज और बूढ़ी होती आबादी पहले से ही तम्बाकू के सेवन के खतरों से जूझ रही है और यह बहुत जरूरी हो गया है कि लोगों को धूम्रपान की आदत को छोडऩे में सहयोग और नये लोगों को धूम्रपान की लत से दूर रखने के लिये कदम उठाये जायें। अध्ययन में चेताया गया है कि विश्व में तंबाकू के खिलाफ लड़ाई में जीत अभी बहुत दूर है। वर्ष 2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के तंबाकू नियंत्रण फ्रेमवर्क कन्वेंशन को लागू किये जाने के बाद भी इसकी रोकथाम नहीं हो पायी है। नीति निर्माताओं को इसे समस्या से निपटने के लिए नए सिरे से और लगातार प्रयास करना होगा।






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