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समाचार ब्यूरो
09/04/2017  :  11:56 HH:MM
अब चाहिए चौकस रणनीति
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चीन ने साफ-साफ कह दिया है कि भारत से उसके संबंध बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर कड़ा विरोध जताते हुए चीन ने कहा- भारत द्वारा तिब्बती धर्मगुरु को चीन सीमा पर विवादित हिस्से में जाने की इजाज़त देना दोनों देशों के संबंधों पर गंभीर असर डालेगा।
उसके बाद चीन के सरकारी मीडिया में कहा गया कि अब चीन कश्मीर मामले में दखल दे सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत ने पूर्ण सोच-विचार और जवाबी रणनीति तैयार करने के बाद ही दलाई लामा को तवांग जाने की इजाजत दी। उनके साथ गए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने जो बयान दिया, उसे भारत की चीन संबंधी एक महत्त्वपूर्ण नीति में परिवर्तन के संकेत के तौर पर देखा गया है। हालांकि ये बात एक प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कही, मगर उसके कूटनीतिक अर्थों को चीन में नजरअंदाज नहीं किया गया है। खांडू ने कहा कि 'अरुणाचल की सीमा चीन से नहीं बल्कि तिब्बत से मिलती है।Ó 2003 में तत्कालीन  प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चीन यात्रा के समय भारत ने तिब्बत को चीन का अभिन्न अंग मान लिया था। ताजा बयान उस रुख के उलट है। इसीलिए दलाई लामा की वर्तमान यात्रा को एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। वैसे भारत ने इस यात्रा को पूरी तरह धार्मिक बताया है। गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजु ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश है। वह धार्मिक नेताओं पर पाबंदी नहीं लगाता। इसलिए चीन को चाहिए कि वो दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा को राजनीतिक रूप में न ले। लेकिन चीन ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप में ही लिया है। उसने औपचारिक तौर पर भारत से विरोध जताया। वहां के मीडिया ने धमकी भरे अंदाज में बात की है। तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकत है। इसीलिए ये सवाल अहम हो गया है कि इसके परिणामों से निपटने की भारत की तैयारी क्या है? हाल के वर्षों में चीन और पाकिस्तान ने अपने आर्थिक एवं सैनिक संबंध मजबूत किए हैं। उसमें रूस को भी जोड़ा है। जबकि नए प्रशासन के तहत अमेरिका की नीति अस्पष्ट है। ऐसे में भारत की चुनौतियां बढ़ जाती हैं। आशा है, एनडीए सरकार इनके प्रति सचेत होगी।






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