हरियाणा मेल ब्यूरो
11/04/2017  :  16:48 HH:MM
बड़े समझौतों के बावजूद
Total View  53

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद का स्वागत करने के लिए प्रोटोकॉल तोडक़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हवाई अड्डा पहुंचे। इस यात्रा के दौरान शेख हसीना के पिता के नाम पर दिल्ली में एक रोड का नामाकरण हुआ। ये बातें प्रमाण हैं कि भारत सरकार ने बांग्लादेश के प्रति सद्भावना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
इसके अलावा दोनों देशों में कई महत्त्वपूर्ण समझौते भी हुए। रक्षा, असैनिक परमाणु सहयोग समेत विभिन्न क्षेत्रों में करीब 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसी दौरान कोलकाता से खुलना के बीच रेल सेवा आरंभ की गईं। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 4.5 अरब डॉलर का कर्ज देने की घोषणा की। सैन्य आपूर्ति के लिए 50 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त ऋण सुविधा का एलान हुआ। शेख हसीना के साथ अपनी साझा प्रेस कांफ्रेंस में मोदी ने बांग्लादेश सरकार की आतंकवाद विरोधी नीति की खुलकर तारीफ की। इसके बावजूद इस यात्रा से शेख हसीना के लिए अपने देश में अनुकूल स्थितियां बनेंगी, ऐसी उम्मीद नहीं है। कारण तीस्ता जल समझौते पर बात का आगे ना बढऩा है। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली आईं। शेख हसीना से मिलीं। लेकिन 2011 से उन्होंने तीस्ता करार में जो रुकावट लगा रखी है, उसका कोई समाधान नहीं निकला। नतीजतन, मोदी महज तीस्ता मुद्दे के जल्द समाधान का आश्वासन दे पाए। उन्होंने इसके प्रति भारत की वचनबद्धता दोहराई। स्वीकार किया कि भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा अहम है। लेकिन बात यहीं ठहर गई। हिमालय से निकल तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल के आधा दर्जन उत्तरी जिलों से बहते हुए बांग्लादेश जाती है। कम बहाव सीजन में इसका 37.5 फीसदी पानी बांग्लादेश को देने का समझौता हुआ है। मगर ममता बनर्जी का दावा है कि ऐसा हुआ तो उनके राज्य के तीस्ता पर निर्भर जिले जल संकट में फंस जाएंगे। उधर बांग्लादेश में भी तीस्ता करार संवेदनशील मुद्दा है। विपक्ष ने शेख हसीना की यात्रा की सफलता का पैमाना इसी को बना रखा था। जाहिर है, इस पर दिखाने के लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के पास ज्यादा कुछ नहीं होगा। रक्षा सहयोग को वहां की कट्टरपंथी पार्टियां भारत के सामने समर्पण बताती हैं। अत: इसे शेख हसीना ज्यादा प्रचारित नहीं कर सकतीं। यानी इस यात्रा की विडंबना है कि इस दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों को खासी प्रगाढ़ता मिली, लेकिन आंतरिक राजनीति में वह शेख हसीना को ज्यादा काम नहीं आएगी।





----------------------------------------------------

Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   6893616
 
     
Related Links :-
मौलिक या कानूनी अधिकार?
प्रशासनिक सुधार की जरूरत
इस घुसपैठ का क्या करें?
अब अमल की करें गारंटी
कैसे होंगी सडक़ें सुरक्षित?
अमेरिका का अजीब खेल
कोविंद के स्वागत के लिए तैयार रायसीना हिल!
कब तक गिनेंगे नोट?
कभी गरीबों का भोजन रहा बाटी चोखा, अब शाही भोजन की पहचान
सुधार का सही मौका
 
http://buypropeciaonlinecheap.com/