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समाचार ब्यूरो
13/04/2017  :  11:33 HH:MM
पाकिस्तान की कुटिल करतूत
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पाकिस्तान ने भारत को भडक़ाने का सुनियोजित दांव चला है। कश्मीर में भडक़ी अशांति को अपने फायदे में मानते हुए उसने ये आक्रामक कदम उठाया। भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को वहां की एक सैन्य अदालत ने सजा-ए-मौत सुना दी। अदालत ने जाधव को देश के खिलाफ जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया। लेकिन ये मुकदमा कहां चला और उसमें क्या प्रक्रिया अपनाई गई, यह किसी को नहीं मालूम।

इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग को इस बारे में कभी सूचना नहीं दी गई। अचानक पाकिस्तानी खुफिया इकाई इंटरसर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने एलान किया कि फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने ‘सभी आरोपों में’ 46 वर्षीय जाधव को दोषी पाया। उन्हें मौत की सजा सुनाई। इसके बाद सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद  बाजवा ने इस फैसले पर मुहर लगा दी। स्पष्टत: ये कथित मुकदमा उस विवादास्पद वीडियो के आधार पर तय हुआ, जिसमें जाधव को जुर्म कबूलते दिखाया गया था। जबकि यातना देकर ऐसे वीडियो तैयार करना कोई नई बात नहीं है। असल सवाल है कि क्या जाधव को अपना बचाव करने का मौका दिया गया? क्या उन्हें बचाव करने के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए गए? अगर भारतीय उच्चायोग को सूचित किया जाता, तो उन्हें ये सुविधाएं मिल सकती थीं। लेकिन पाकिस्तान का इरादा दूसरा है। उसे लगता है कि इस मौके पर भारत से टकराव लिया जा सकता है। दलाई लामा विवाद पर चीन से भारत के संबंध बिगड़े हैं। उधर ओआईसी के महासचिव ने बयान दिया है कि इस्लामी देशों का ये संगठन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख के साथ है।

अमेरिका ने भी भारत-पाक संबंधों के बीच हस्तक्षेप का इरादा दिखाया है। तो पाकिस्तान के रणनीतिकार इस निष्कर्ष पर पहुंचे होंगे कि यह सही मौका है, जब भारत से तनाव बढ़ाया जाए। वरना, जाधव को पिछले साल तीन मार्च को पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने अशांत बलूचिस्तान प्रांत से ‘गिरफ्तार’ किया था। पाकिस्तान का आरोप था कि जाधव भारतीय नौसेना का ‘सेवारत अधिकारी’ था और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) में डेपुटेशन पर था। भारत ने यह तो माना है कि जाधव ने नौसेना में काम किया है, लेकिन सरकार के साथ उसके किसी संबंध या उसके जासूसी में शामिल होने की बात खारिज किया। बहरहाल, तथ्यों पर तब बात होती, अगर पाकिस्तान का इरादा सच तक पहुंचने का होता। लेकिन उसे भारत विरोधी हरकत करनी थी, जो उसने किया। अब यह भारत पर है कि वह इसका माकूल जवाब दे।






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