हरियाणा मेल ब्यूरो
16/04/2017  :  11:19 HH:MM
अफस्पा पर सुधार याचिका
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केंद्र अफस्पा (सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून) वाले क्षेत्रों में सेना की ताकत घटाने के पक्ष में नहीं है। इसलिए उसने सर्वोच्च न्यायालय में सुधार (क्यूरेटिव) याचिका डाली है। मकसद वो फैसला पलटवाना है, जिसके जरिए सुप्रीम कोर्ट ने जिन क्षेत्रों में अफस्पा लागू है, वहां भी मुठभेड़ में मौत होने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य बना दिया था। 8 जुलाई 2016 को सर्वोच्च न्यायालय ने अफस्पा के तहत सुरक्षा बलों को मिलने वाले विशेष सुरक्षा अधिकारों को निरस्त कर दिया।
मगर केंद्र का तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश से अशांति वाले क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना असंभव हो जाएगा। साफ है, सरकार सेना की राय के साथ गई है। सेना अफस्पा में कोई नरमी नहीं चाहती। तो केंद्र ने कहा है कि भारतीय सेना को परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने की शक्तियां देनी ही  होंगी। उन शक्तियों के आधार पर लिए गए फैसले को एक सामान्य मौत के बाद की जाने वाली पड़ताल जैसा नहीं लिया जा सकता। यानी सरकार की दलील है कि सैन्य कार्रवाइयों के दौरान लोगों के हताहत होने की घटनाओं को न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं लाया जा सकता। इस क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। जब अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जब केंद्र का पक्ष रखा, तो प्रधान न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच उससे सहमत नहीं दिखी। तब अटॉर्नी जनरल ने जोर दिया कि यह बहुत गंभीर मामले से जुड़ी याचिका है। आतंकवादियों से मुकाबले में सुरक्षा बल के जवान हर बार अपनी जान खतरे में डालते हैं। फिर यह देश की संप्रभुता और अखंडता के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण याचिका है। उन्होंने तर्क दोहराया कि सेना जब हथियारों से लैस उपद्रवियों का सामना कर रही हो, तो उसे अपने ताकत के इस्तेमाल की छूट होनी ही चाहिए। अगर कोई सैनिक किसी आतंकवादी के खिलाफ कार्रवाई कर रहा हो और उसे एफआईआर दर्ज होने का भय हो, तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई बहुत मुश्किल आएगी। जाहिर है, केंद्र के तर्क घूमफि र कर अपने मूल स्थान पर पहुंच गए हैँ। पूर्व यूपीए सरकार के समय इस कानून में बदलाव के संकेत दिए गए थे। इसके तहत जवाबदेही तय करने की बात आई थी। कारण, अफस्पा वाले  इलाकों में उठा जन- असंतोष था। लेकिन अब केंद्र ने सेना की भावनाओं की अधिक चिंता करने का मन बना लिया है।





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