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हरियाणा मेल ब्यूरो
18/04/2017  :  10:44 HH:MM
क्या करें सुरक्षा बल?
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कश्मीर घाटी में वीडियो बनाम वीडियो की जंग चल रही है। पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक आक्रामक भीड़ को सीआरपीएफ के जवानों से बदतमीजी करते देखा गया। उस वीडियो से अंदाजा लगा कि घाटी में सुरक्षा जवान किन विकट परिस्थितियों में काम करते हैं और सामान्यत: वे कितने संयम का परिचय देते हैं।

मगर उसके बाद दो अन्य वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गए। इनमें एक तो नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया। उसमें एक कश्मीरी नौजवान को मानव ढाल बने दिखाया गया। नजर आया कि सेना के एक वाहन में बांध कर उसे आगे बैठाया गया है और वो वाहन 18 किलोमीटर तक उसी रूप में चला। उसके बाद जारी हुए एक वीडियो में सेना के जवान युवकों की पिटाई करते और उन्हें पाकिस्तान विरोधी नारे लगाने को मजबूर करते दिखे। एक अन्य वीडियो में सेना के चार जवान पुलवामा डिग्री कॉलेज के एक छात्र को जमीन पर गिराकर बेंत से उसकी पिटाई करते देखे गए। ये वीडियो वास्तविक हैं या नहीं- यह नहीं मालूम। ये वीडियो किसने बनाए, ये भी पता नहीं है। लेकिन कश्मीर में सोशल मीडिया पर उन्हें भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकार हनन के सबूत के रूप में पेश किया गया है। उन को लेकर बहस, निंदा और आलोचना का दौर चल रहा है। कुछ उसी तरह जैसी प्रतिक्रिया सीआरपीएफ जवानों के साथ बदतमीजी को देखकर भारत के बाकी हिस्से में हुई।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्य पुलिस से इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बताया गया है कि सेना ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। राज्य सरकार और सेना को यह अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए कि अगर वैसी घटनाएं सचमुच हुई हैं, तो उनके लिए दोषी लोगों की पहचान की जाए। बहरहाल, यह मामला महज सुरक्षा बलों का नहीं है। असली मुद्दा है कि राजनीतिक नेतृत्व हालात से कैसे निपटना चाहता है। कश्मीर की परिस्थितियों को सीआरपीएफ संभाले, या बीएसएफ या सेना- यह राजनीतिक स्तर पर होना चाहिए। इनमें से जो भी बल वहां तैनात हो, उसे स्थितियों से निपटने के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिया जाना चाहिए। कभी सख्ती तो कभी मरहम की बातें सुरक्षाकर्मियों के मन में भ्रम पैदा करती हैं। नतीजतन, भडक़ाऊ स्थितियों से वे किसी तय प्रोटोकॉल के तहत नहीं निपट पाते। कश्मीर में हालात जहां पहुंच गए हैं, अब ऐसे भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जानी चाहिए।






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