हरियाणा मेल ब्यूरो
01/05/2017  :  08:34 HH:MM
नदियों को भी अपना जीवन जीने का नैसर्गिक अधिकार मिले
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माँ गंगा और यमुना के बाद अब नर्मदा नदी को भी मनुष्य के समान अधिकार प्राप्त होंगे। देवी नर्मदा भी अब जीवित इंसानों जैसी मानी जाएंगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी घोषणा की है। जल्द ही विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर नर्मदा नदी को इंसान का दर्जा दे दिया जाएगा।

यह शुभ घोषणा है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन, जीवनदायिनी नदियों को मनुष्य के समकक्ष स्थापित करने से पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि हमारे ग्रंथों में नदियों का स्थान बहुत ऊँचा है। वेदों में नदियों को माँ ही नहीं, अपितु देवी माना गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने नदियों को लेकर यह मान्यता इसलिए स्थापित की थी, ताकि हम नदियों के प्रति अधिक संवेदनशील रहें। उनके प्रति कृतज्ञ रहें। नदियों के प्रति अतिरिक्त आदर भाव रहे। जब मनुष्य नदियों को माँ मानेगा और उन्हें दैवीय स्थान पर रखेगा, तब उसको नुकसान नहीं पहुँचाएगा। यह हमारे समाज का दुर्भाग्य है कि हम अपने पुरखों की सीख को विसर्जित कर कर्मकांड
तक सीमित होकर रह गए। सम्मान के सर्वोच्च स्थान 'माँ' के प्रति भी हम लापरवाह हो गए। हमारी यह लापरवाही नदियों के जीवन के लिए खतरा बन गई। आज न्यायालयों और सरकारों को नदियों को न्याय दिलाने के लिए उन्हें मनुष्य की तरह जीवंत मानने को मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि हमारे यहाँ सदैव से
नदियों को जीवंत ही माना गया है।

नदियों के संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुनिया के सबसे बड़े नदी संरक्षण अभियान ‘नमामि देवी नर्मदे : सेवा यात्रा’ का संचालन कर रहे हैं। जनसहभागिता से प्रत्येक दिन नर्मदा के किनारे नदी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए बड़े-बड़े आयोजन किए जा रहे हैं। नर्मदा सेवा यात्रा के अंतर्गत इन आयोजनों में देश-दुनिया के अलग-अलग विधा के प्रख्यात लोग आ चुके हैं। इसी सिलसिले में मण्डला में आयोजित जन-संवाद कार्यक्रम में शामिल होने गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी पहुँचे थे। नर्मदा सेवा यात्रा की आवश्यकता को देखकर उन्होंने प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का सुझाव दिया। चूँकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का जन्म नर्मदा के किनारे ही हुआ। नर्मदा जल से सिंचित भूमि से उत्पन्न अन्न ने उनको पोषण किया है। 11 दिसंबर, 2016 से प्रारंभ हुई नर्मदा सेवा यात्रा में प्रतिदिन मुख्यमंत्री शामिल हो रहे हैं। देवी नर्मदा को लेकर उनके मन में अगाध श्रद्धा उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है। जब उत्तराखंड के नैनीताल उच्च न्यायालय ने मोक्षदायिनी माँ गंगा नदी को मनुष्य के समान अधिकार देने का ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था और गंगा नदी को भारत की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी थी, तब ही शिवराज सिंह चौहान के मन में यह विचार जन्म ले चुका था। वह भी सेवा यात्रा के दौरान नर्मदा नदी को मनुष्य के समान दर्जा देने के लिए उचित अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। मंडला जिले में यह अवसर आया, जब गृहमंत्री ने सुझाव दिया और अविलम्ब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उस सुझाव का स्वागत किया। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि देवी नर्मदा के अच्छे दिन आएंगे।





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