हरियाणा मेल ब्यूरो
03/05/2017  :  10:55 HH:MM
अंतरिक्ष कूटनीति की संभावनाएं
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपने ‘मन की बात’ के जरिए अपनी दक्षिण एशियाई दृष्टि को फिर से चर्चा में ले आए। उन्होंने कहा- "पांच मई को भारत अपना दक्षिण एशियाई उपग्रह प्रक्षेपित करेगा। पूरे दक्षिण एशिया से सहयोग बढ़ाने की दिशा में यह भारत का महत्त्वपूर्ण कदम है।"
जानकारों ने इसे मोदी सरकार की अंतरिक्ष कूटनीति कहा है। 450 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस उपग्रह की सेवाएं सभी दक्षिण एशियाई देशों को उपलब्ध होंगी। प्रधानमंत्री के प्रसारण के बाद सरकारी सूत्रों ने कहा कि नई पेशकश के जरिए प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ-सबका विकास’ के अपने नारे का दायरा समग्र दक्षिण एशिया तक फैला दिया है। ध्यान दिलाया गया कि पड़ोसी देशों को उपग्रह सेवाएं बिना किसी लागत के मिलेंगी। इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक नए धरातल पर पहुंचेगा। यह तो सच है कि भारत के पड़ोसी देश अंतरिक्ष तकनीक में पिछड़े हुए हैँ। लेकिन क्या मोदी की ताजा पेशकश से भारतीय विदेश नीति के मकसद सधेंगे? ध्यानार्थ है कि पाकिस्तान आतंक को प्रश्रय देने की नीति पर लगातार चल रहा है। इसके आधार पर भारत ने उससे संवाद तोड़ रखा है। लेकिन यह साफ है कि इन परिस्थितियों से पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र के साझा विकास का मोदी का सपना प्रभावित नहीं हुआ है। बल्कि अब उसे साकार करने की दिशा में उनकी सरकार ने एक अहम पहल की है। लेकिन इस पहल से सभी पड़ोसी देश प्रभावित होंगे, इसकी संभावना फिलहाल कमजोर है। इसकी बड़ी वजह इस क्षेत्र में चीन की घुसपैठ है। जहां तक संसाधनों के निवेश या सुविधाएं प्रदान करने की बात है, तो चीन बेशक इसमें भारत से बीस ठहरता है। उसने न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि श्रीलंका, म्यामार और अब नेपाल में भी इस रास्ते अपनी जगह बना ली है। बांग्लादेश भी उसकी पहुंच से दूर नहीं है। इन स्थितियों की पूरी जिम्मेदारी मोदी सरकार पर नहीं डाली जा सकती। इसके बावजूद इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि मोदी सरकार अब तक पासपड ़ोस की कोई सुसंगत और निरंतर नीति पेश नहीं कर पाई है। पहल कभी-कभार के इवेन्ट यानी ध्यानाकर्षक घटनाओं के रूप में की गई है, जो अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाईं। ऐसी पहल देसी समर्थक वर्ग में तो बहुचर्चित होती है, लेकिन उससे कूटनीति संबंधी उद्देश्य प्राप्त नहीं होते। आशंका है कि उपग्रह की पहल भी कहीं इस बड़े रूझान का शिकार ना हो जाए।





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