हरियाणा मेल ब्यूरो
05/05/2017  :  10:49 HH:MM
ताकि जन-हित सर्वोपरि रहे
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जनहित याचिका की धारणा न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर और न्यायमूर्ति पीएन भगवती के युग में विकसित हुई। उद्देश्य यह संदेश देना था कि न्यायपालिका गरीबों के लिए भी है। यह तो निर्विवाद है कि भारत की महंगी न्याय व्यवस्था के बीच गरीब तो दूर, आम मध्यवर्गीय व्यक्ति के लिए भी अदालत की पनाह की लेना संभव नहीं होता।

तो जनहित याचिका का तरीका ढूंढा गया। इसकी विशेषता यह है कि शोषण, अत्याचार या महरूमियत से सीधे तौर पर प्रभावित ना होने वाला व्यक्ति भी किसी और के मामले को अदालत के दरवाजे तक पहुंचा सकता है। इस माध्यम का पिछले चार दशकों में खूब उपयोग हुआ है। लेकिन इसके दुरुपयोग के मामले
भी कम नहीं हैं। प्रचार पाने या निहित स्वार्थी हितों को साधने के लिए न्यायालयों में जनहित याचिकाएं डाली गईं।

यह प्रवृत्ति कैसे रुके, यह न्यायपालिका के साथ-साथ आम सार्वजनिक चिंता भी रही है। अब ऐसा करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक ठोस कदम उठाया है। उसने तुच्छ याचिकाएं दायर करने वाले राजस्थान के एक ट्रस्ट पर 25 लाख रुपए का जुर्माना किया है। साथ ही भविष्य में ट्रस्ट द्वारा जनहित याचिका दाखिल करने
पर रोक लगा दी है। सुराज इंडिया ट्रस्ट नामक इस संस्था ने पिछले 10 साल में जनहित के नाम पर देश की अलग-अलग अदालतों में 64 याचिकाएं दायर कीं। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को एक महीने में जुर्माना अदा करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि न्यायपालिका का समय नष्ट करना गंभीर मसला है। खंडपीठ ने ट्रस्ट को  उसके आदेश की प्रति उन अदालतों के समक्ष पेश करने के लिए कहा जहां-जहां उसे जनहित याचिकाएं दायर कर रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश अलतमस कबीर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही चलाने की गुजारिश सहित कई जनहित याचिकाएं इस संस्था ने दायर कीं। लेकिन अब सुराज इंडिया ट्रस्ट और उसके संस्थापक राजीव दहिया देश में कहीं भी जनहित याचिका दायर नहीं कर सकेंगे। आशा की जानी चाहिए कि इस मामले से वैसी बहुत-सी दूसरी संस्थाएं और व्यक्ति सबक लेंगे, जिन्होंने इस माध्यम का दुरुपयोग किया है। पूर्व यूपीए सरकार ने जनहित याचिका को परिभाषित करने के लिए कानून बनाने की पहल की थी। लेकिन उसे जनहित याचिकाओं पर लगाम लगाने की कोशिश समझा गया। बहरहाल, अब ऐसे मामलों को अनुशासित की पहल सर्वोच्च न्यायालय ने की है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।





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