हरियाणा मेल ब्यूरो
11/05/2017  :  16:40 HH:MM
राजनाथ सिंह का ‘समाधान’
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गृह मंत्री राजनाथ सिंह नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई। अब यह इस समस्या के प्रति जारी लापरवाह नजरिए का ही संकेत है कि पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद इसमें नहीं आए।

पहुंचे मुख्यमंत्रियों में से नीतीश कुमार से शिकायत जता दी कि केंद्र इस मसले से निपटने की सारी जिम्मेदारी राज्यों पर डालकर खुद पल्ला छुड़ाना चाहता है। कहा कि समस्या खत्म करनी है तो केंद्र को भी समान दायित्व उठाना होगा। उन्होंने उन प्रस्तावों का जिक्र किया, जो उनकी सरकार ने केंद्र को भेजा था। इसमें बिहार
सरकार ने पांच करोड़ रुपए तक संपत्ति जब्त करने का अधिकार आईजी रैंक के अधिकारी को देने की मांग की थी। साथ ही विशेष बुनियादी ढांचा योजना, एकीकृत कार्य-योजना, सुरक्षा संबंधी इंतजामों तथा पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र से अतिरिक्त धन मांगा था। नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र ने इसमें से कोई मांग पूरी नहीं की। नीतीश कुमार और अन्य राज्य ऐसी मांगों पर बिना कोई ठोस उत्तर पाए लौट गए। इस बीच गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए अपना आठ सूत्रीय ‘‘समाधान’’ बताया। यह ‘‘समाधान’’ उन अंग्रेजी शब्दों के पहले अक्षरों से बना है, जिन्हें उपाय के बतौर गृह मंत्री ने राज्यों के सामने रखा- स्मार्ट लीडरशिप का एस, एग्रेसिव स्ट्रेटेजी का ए, मोटिवेशन एंड ट्रेनिंग का एम, एक्शनेबल इंटेलीजेंस का ए, डैशबोर्ड बेस्ट की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स का डी, हारनेसिंग टेक्नोलॉजी का एच, एक्शन ह्रश्वलान फॉर इच थ्रेट का ए और नो एक्सेस टू फाइनेसिंग का एन। इस तरह वर्तमान सरकार के तहत कई शब्दों के प्रथम अक्षरों को मिलाकर नए-नए शब्द गढऩे की परंपरा आगे बढ़ी। दस राज्यों के प्रतिनिधियों से राजनाथ सिंह से इसे ‘लक्ष्य की एकता’ के रूप में स्वीकार कर लागू करने का अनुरोध किया। उन्होंने पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए नक्सल विरोधी अभियानों में हर कदम पर आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत बताई। बहरहाल, ‘‘समाधान’’ शब्द भले नया हो, लेकिन क्या इसमें निहित बातें भी नई हैं? फिर मुद्दा है कि हर अक्षर में निहित बात को अमली जामा पहनाने की समन्वित रणनीति क्या है? नीतीश कुमार के बयान से साफ है कि ऐसी कोई ठोस कार्ययोजना बैठक में नहीं उभरी। तो क्या यह कहना गलत होगा कि हाल में छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के 25 जवानों की हत्या के बाद ऐसी बैठक की रस्म-अदायगी की गई?





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