हरियाणा मेल ब्यूरो
12/05/2017  :  11:06 HH:MM
प्रश्न संस्था की प्रतिष्ठा का
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जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की तौहीन के इल्जाम में जेल भेजने का आदेश दिया है। भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोर्ट ने किसी कार्यरत न्यायाधीश के खिलाफ इतना सख्त हुक्म दिया हो। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने मीडिया को जस्टिस कर्णन के बयान प्रकाशित/प्रसारित करने से रोक दिया है। चूंकि यह अपनी तरह का पहला फैसला है, इसलिए इस पर समाज के कुछ समूहों में व्यग्रता देखी गई है।
आपत्ति यह उठाई गई है कि सुप्रीम कोर्ट ने ना सिर्फ जस्टिस कर्णन को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया, बल्कि उनकी बातें आम जनता तक ना पहुंचे- इसका इंतजाम भी कर दिया है। लेकिन ऐसी राय बनाने से पहले इस घटना के पूरे संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है। जस्टिस कर्णन 2009 में मद्रास हाई कोर्ट के एडिशनल जज बने थे। उसके बाद से जजों और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपने विवादास्पद बयानों की वजह से वे लगातार सुर्खियों में रहे। 2011 से वे आरोप लगा रहे हैं कि दलित होने के कारण उनको प्रताडि़त किया जा रहा है। इस साल फरवरी में उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट के 20 जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को उन्हें नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न इसे कोर्ट की अवमानना माना जाए। इस मामले में वे बीते 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। लेकिन वहां अपनी सफाई देने की बजाय वे लगातार अपने न्यायिक और प्रशासनिक अधिकार बहाल करने की मांग करते रहे। बीते अप्रैल में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों पर प्रताडऩा का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश दे दिया।  पिछले सोमवार को उन्होंने प्रधान न्यायधीश जेएस खेहर और सुप्रीम कोर्ट के छह अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के सश्रम कारावास  की सजा सुना दी। इन जजों की पीठ ही उनके खिलाफ सुनवाई कर रही है। उन न्यायाधीशों पर अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध का आरोप लगाते हुए उन्होंने उनको सजा सुनाई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के पास क्या विकल्प रह गया? जस्टिस कर्णन ने न्यायपालिका के समक्ष ऐसा संकट खड़ा कर दिया, जिसके बीच सुप्रीम कोर्ट कठिन कदम उठाने पड़े। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट को यह अवश्य सोचना चाहिए कि ये हाल क्यों पैदा हुआ और भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए?





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