हरियाणा मेल ब्यूरो
15/05/2017  :  18:05 HH:MM
फांसी पर अंतरराष्ट्रीय फरमान
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भारत की याचिका पर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने पाकिस्तान को लिखकर निर्देश दिया है कि भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी को फिलहाल रोक दिया जाए। यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की गौरतलब जीत है। नीदरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने भारत-पाक के संदर्भ में ऐसे विरोधाभासों को देखा होगा, जिनके आधार पर यह रोक लगाई गई है। भारत और पाकिस्तान ने इस संदर्भ में 1960 की संधि पर दस्तखत किए थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होता रहा है। 1999 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक याचिका दर्ज की थी, लेकिन तब हमारी दलील थी कि यह आईसीजे का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

आज हम एक भिन्न भूमिका में हैं और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला मानने को बाध्य नहीं है, लेकिन उसे अराजक करार दिया जाएगा। पाकिस्तान दुनियावी मंत्र पर अलग-थलग पड़ सकता है। पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे, प्रख्यात राजनयिक जी. पार्थसारथी का मानना है कि भारत संयुक्त राष्ट्र काउंसलर रिश्ते के लिए संधि के प्रावधानों के तहत आईसीजे में गया है। यह ऐसा प्रावधान है, जिसे लेकर दोनों देश आईसीजे की भूमिका को स्वीकार कर चुके हैं। उनका यह भी मानना है कि पाकिस्तान ने वियना संधि के हरेक प्रावधान का उल्लंघन किया है, लिहाजा भारत के पास मौका है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बना फांसी की सजा टालने के लिए पाकिस्तान को विवश करे। हमारा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत के फरमान के बाद पाकिस्तान की सैन्य कोर्ट कुलभूषण जाधव को फांसी देने का दुस्साहस नहीं करेगी। इस संदर्भ में पाक के वजीर-ए-आजम नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल बाजवा की मुलाकात हुई और करीब 90 मिनट तक बातचीत हुई। जाहिर है कि आपसी विमर्श में कुछ तय भी किया गया होगा! लेकिन 1960 की संधि के अलावा, वियना संधि भी है, जिसके तहत दोनों देश बाध्य हैं कि ऐसे मामलों में कथित आरोपित को बचाव का मौका दिया जाए। दोनों देशों के राजनयिक और दूतावासों की पहुंच भी उस आरोपित तक तय की जानी चाहिए।
लेकिन पाकिस्तान ने उल्लंघन किया है।

भारत की 16 बार राजनयिक संपर्क की मांग को पाकिस्तान ने मंजूर नहीं किया। सैन्य अदालत की कार्रवाई का ब्यौरा भारत को उपलब्ध नहीं कराया गया। जाधव की मां की याचिका के बारे में कोई जवाब नहीं दिया गया। उनके परिवार को वीजा देने से भी इनकार कर दिया गया। जाधव कहां है और किस अवस्था में है, इसकी जानकारी भी भारत सरकार को नहीं दी गई। ये सभी वियना संधि के उल्लंघन हैं। भारत ने इसे ही आधार बनाकर संधि के प्रावधान की धारा-74 के उप पैरा चार के तहत आईसीजे में मामला दाखिल किया था। यहां तक कि ईरान के राजनयिकों ने साफ तौर पर कहा है कि जाधव को अगवा किया गया था। वह कानूनी तौर पर ईरान में रहते और कारोबार करते थे। हैरत के दो विरोधाभासी बयान भी गौरतलब हैं। पाक गृह मंत्री का कहना है कि जाधव को पाक- अफगानिस्तान सरहद से पकड़ा गया, जबकि पाकिस्तान के ही फौजी अफसर का बयान था कि उसे पाक-ईरान सरहद से पकड़ा गया। हकीकत इन विरोधाभासी बयानों में निहित नहीं है। दरअसल जाधव के पास न तो बम-बारूद-बंदूक मिले थे और न ही कोई आपत्तिजनक, गोपनीय नक्शा पाया गया था।





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