हरियाणा मेल ब्यूरो
17/05/2017  :  10:46 HH:MM
साइबर अपराधियों का हमला
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साइबर हमला नई बात नहीं है। पहले भी हैकरों ने इसकी कोशिश की। ऐसे मैलवेयर (वो सॉफ्टवेयर जो कंह्रश्वयूटर सिस्टम्स को अस्त-व्यस्त कर देते हैं) संचारित किए गए, जिससे दुनियाभर में मुश्किलें खड़ी हुईं। लेकिन पहले ऐसे काम या तो शौकिया हैकरों ने किए या किसी खास देश को वैचारिक या राष्ट्रवादी आग्रहों से निशाना बनाया गया।

लेकिन यह शायद पहला मौका है, जब साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह ने मैलवेयर संचारित कर कंह्रश्वयूटर प्रणालियों को जाम किया और फिर उसे चालू करने के लिए फिरौती मांगी। वानाक्राई नामक मैलवेयर से तकरीबन 150 देश प्रभावित हुए हैँ। आशंका जताई गई है कि इसी हफ्ते वैसा एक और हमला हो सकता है। स्पष्टत: दुनिया के सामने एक नए प्रकार का साइबर खतरा उपस्थित हो गया है। मैलवेयर के कारण दर्जनों देशों के बैंकों, अस्पतालों और सरकारी एजेंसियों आदि के कंह्रश्वयूटर सिस्टमों ने काम करना बंद कर दिया। ब्रिटेन और स्पेन जैसे देश सर्वाधिक प्रभावित हुए। फेडएक्स कूरियर सेवा और यूरोपीय कार फैक्टरियों के
कामकाज पर भी असर पड़ा।

बीते शुक्रवार को दुनियाभर की विभिन्न सरकारी एजेंसियां और बड़ी कंपनियां इस हमले के कारण एक तरह से बंधक बन गईं। बिटकॉयन में 300 डॉलर के भुगतान की मांग करने वाला जो संदेश पीडि़त संस्थाओं के कंह्रश्वयूटर स्क्रीन पर आया। उसमें लिखा था- उह्रश्वस, योर फाइल्स हैव बीन एनक्रिह्रश्वटेड"। कहा गया
कि भुगतान तीन दिन में होना चाहिए, वरना राशि दोगुना कर दी जाएगी। सात दिन में रकम नहीं दी गई, तो फाइलें डिलीट कर दी जाएंगी। लेकिन विशेषज्ञों और सरकार ने हैकरों की मांग न मानने को कहा है। अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्रालय के कंह्रश्वयूटर आपात प्रतिक्रिया दल ने कहा कि फिरौती देना इसकी गारंटी नहीं है कि एनक्रेह्रिश्वटड फाइलें छोड़ दी जाएंगी। यूरोप की पुलिस एजेंसी यूरोपूल ने कहा- ये हमला अभूतपूर्व स्तर का है और दोषियों का पता लगाने के लिए एक जटिल अंतरराष्ट्रीय जांच की जरूरत होगी।" यूरोपूल ने बताया कि उसके यूरोपियन साइबरक्राइम सेंटर में एक विशेष कार्यबल बनाया गया है। यूरोपुल ने चेताया कि वायरस फैलाने वालों का मकसद पीडि़त कंपनियों से धन वसूलना और साथ-साथ ही कुछ मामलों में उनकी बैंक संबंधी जानकारियां हासिल करना भी है। इन विवरणों से जाहिर है कि ताजा हमले के परिणाम कितने दूरगामी हैं। ये साफ है कि दुनिया अभी ऐसे खतरों से निपटने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन अब इस तैयारी में किसी लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।





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