हरियाणा मेल ब्यूरो
18/05/2017  :  11:28 HH:MM
सरकार का सही रुख
Total View  37

केंद्र सरकार ने तीन तलाक की मुस्लिम प्रथा के बारे में सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सामने दो-टूक बयानी की। वाजिब रुख लिया कि कोर्ट को यह देखना चाहिए कि ये (और दूसरी कुछ प्रथाएं) संविधान-सम्मत हैं या नहीं। उसे कुरआन की व्याख्या में नहीं उलझना चाहिए। आखिर वह कोई धर्म-संस्था नहीं है।

केंद्र ने कहा कि अगर अदालत तीन तलाक को अमान्य और असंवैधानिक करार देती है, तो सरकार मुसलमानों में शादी और तलाक के नियमन तय करने के लिए कानून बनाएगी। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सामने ये बात तब कही,  जब अदालत ने उनसे पूछा कि अगर वह तीन तलाक प्रथा को निरस्त कर देती है, तो विवाह संबंध से निकलने के लिए किसी मुस्लिम मर्द के पास क्या तरीका बचेगा? फिलहाल, ये सवाल अहम नहीं है कि सरकार ने आखिर पहले ही कानून बनाने की पहल क्यों नहीं की। यह अच्छी बात है कि अब उसने ऐसा करने का इरादा  दिखाया है, हालांकि ऐसा वह कोर्ट की आड़ में करना चाहती है।

कोर्ट ने बीते 11 मई को उत्तराखंड की पीडि़त महिला शायरा बानो की याचिका पर सुनवाई शुरू की। शायरा बानो ने तीन तलाक के साथ-साथ निकाह हलाला और बहु-पत्नी प्रथा को भी असंवैधानिक घोषित करने की गुजारिश की है। सुनवाई के पहले ही दिन कोर्ट से इस रुख से निराशा हुई कि वह सिर्फ यह देखेगा कि तीन
तलाक कुरआन के मुताबिक इस्लामिक है या नहीं। यह रुख समस्याग्रस्त है क्योंकि सुनवाई कर रहे जज संविधान और आधुनिक विधि व्यवस्था के विद्वान हैं, इस्लामिक या किसी धर्म से जुड़े ग्रंथों और परंपराओं के नहीं। इस्लाम में कई पंथ हैं। उनके धर्मगुरुओं ने कुरआन या हदीस की कई बातों की अपने-अपने ढंग से व्याख्या की है। उनके अनुयायी उन्हें मानते हैं। कोर्ट की व्याख्या स्वीकार करने में उन्हें दिक्कत हो सकती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि (जैसाकि अब केंद्र ने भी कहा है) कोर्ट संवैधानिक प्रावधानों की रोशनी में फैसला दे। फिर कोर्ट का यह रुख भी निराश करने वाला है कि फिलहाल वह सिर्फ तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई करेगा, बहुविवाह और निकाह हलाला के मुद्दों को बाद में सुना जाएगा। मुस्लिम महिलाओं के एक बड़े हिस्से को इन पर भी घोर आपत्ति है। इसीलिए कोर्ट से अपेक्षा टुकड़ों में नहीं, बल्कि समग्र निर्णय की है।





----------------------------------------------------

Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   338441
 
     
Related Links :-
विपक्ष की हारी चुनौती
राष्ट्रपति पर असहमति की जिद
कर्ज माफी की होड
हमेशा दबे-कुचलों की बुलंद आवाज रहे हैं रामनाथ कोविंद
सहमति का अजीब तरीका
पासपोर्ट बनवाने के लिए दूर नहीं जाना होगा
कलाम की तरह पीपुल्स प्रेसिडेंट चाहिए
फिल्म जगत की ब्यूटी क्वीन थी नसीम बानो
आस्तीन के कश्मीरी सांप!
माल्या की इतनी हिम्मत!