14/11/2016  :  12:22 HH:MM
सीप मांस की बढ़ती मांग को देखकर सीपपालन पर जोर
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लजीज स्वाद और पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण देश में सीप के मांस की बढ़ती मांग के मद्देनजर समुद्री तटवर्ती क्षेत्रों में सीपपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृत्रिम मोती के लिए पहले से ही देश के समुद्री तटीय क्षेत्रों के खारे और मीठे पानी में सीपपालन किया जा रहा है लेकिन हाल के वर्षोँ में सीप के मांस के प्रति खासकर विदेशी पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण सीप के कुछ किस्मों के पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर ) के मत्स्य विज्ञान विभाग के उप महानिदेशक जे के जेना ने बताया कि विदेशी विशेषकर यूरोपीय पर्यटकों के बीच सीप के मांस की भारी मांग है और बड़े- बडे होटलों में इसकी आपूर्ति की जाती है।देश में सीप के मांस की मांग सालाना 20 से 25 हजार टन तक पहुंच गयी है।
डा जेना ने बताया कि सीप की मसल ग्रीन और ऑएस्टर किस्म की मसल फार्मिंग को तटीय राज्यों में बढ़ावा दिया जा रहा है।केरल और तमिलनाडु में खासकर ओएस्टर सीप का पालन किया जा रहा है तथा इसके पालन क्षेत्र में लगातार वृद्धि हो रही है। डा जेना ने बताया कि इसी प्रकार से मसल ग्रीन सीप का पालन ओडिशा, केरल , तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कुछ अन्य राज्यों में किया जा रहा है। इसका मांस बहुत स्वादिष्ट होता है तथा पोषक तत्वों विशेषकर प्रोटीन से भरपूर होता है। किसानों को 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक इसका मूल्य मिल जाता है।

मत्स्य विज्ञान विशेषज्ञ ने बताया कि कृत्रिम मोती के लिए भी सीप पालन किया जा रहा है लेकिन इसकी तकनीक काफी जटिल है, जिसकी वजह से बहुत अधिक लोगों को इसमें पूरी तरह से सफलता नहीं मिल पाती है। देश में अब ऐसी तकनीक विकसित कर ली गयी है, जिससे लोग जिस तरह के आकार या आकृति
की मोती की मांग करें, उसी आकार में उन्हें मोती उपलब्ध कराया जा सकता है। उदाहरण के लिए ओम या भगवान श्रीकृष्ण की आकृति की मोती चाहने पर उन्हें वैसी ही मोती उपलब्ध करायी जाती है। हालांकि इस तरह की मोती के लिए मनमानी कीमत भी चुकानी पड़ती है। डा जेना ने बताया कि खारे और मीठे पानी में सीप पालन का प्रशिक्षण सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफा फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर (सीआईएफए) भुवनेश्वर में दिया जाता है। इस संस्थान में हर साल 30 लोगों को ही 60 दिनों तक प्रशिक्षण दिया जाता है जबकि प्रशिक्षण के लिए 3000 से अधिक लोग आवेदन करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में सीपपालन आसानी से किया जा सकता है। यह कम लागत में अच्छी आय का साधन है और हाल के वर्षों में लोगों में सीपपालन को लेकर आकर्षण बढ़ा है। 






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