समाचार ब्यूरो
19/06/2017  :  10:11 HH:MM
रेजांगला युद्ध के योद्धा मेजर जरनल गुरदीप सिंह नहीं रहे
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जालंधरत्न चीन के साथ लद्दाख के रेजांगला में युद्ध में भारत को विजय दिलाने वाली टीम के सदस्य रहे मेजर जरनल गुरदीप सिंह का निधन हो गया। वह 83 साल के थे। उनकी आत्मिक शांति के लिए अरदास 20 जून को अर्बन इस्टेट फेस-1 के गुरुद्वारा साहिब में दोपहर 12 से 1 बजे तक होगी। सन् 1962 की लड़ाई में चीन के साथ युद्ध में भारतीय सेना को कई मोर्चों पर हार का सामना करना पड़ा।

लेकिन लद्दाख के चुशूल सेक्टर में शौर्य का ऐसा इतिहास रचा कि तमाम प्रयासों के बावजूद चीनी सैनिक रेजांगला पर कब्जा नहीं कर पाए। रेजांगला की सुरक्षा का जिम्मा जिस कुमाऊं रेजीमेंट को सौंपा गया। मेजर जरनल उसी टीम का हिस्सा थे। यह उनके जीवन की पहली युद्ध था, जिसमें उन्होंने अपनी बहादुरी का परिचय दिया था। इस लड़ाई में भारतीय सेना के कई अधिकारी और जवान शहीद हो गए। इसके बावजूद चुशूल पर चीनी सैनिक कब्जा नहीं कर पाए। मेजर जरनल गुरदीप का जन्म 1934 में कराची में हुआ था। बंटवारे के बाद वह पंजाब गए और जालंधर के सिविल लाइन में रहने लगे। उनके पिता सरदार साहिब मेजर करतार सिंह भी आर्मी में थे। सरदार साहिब की उपाधि अंग्रेजों ने ही उन्हें दी थी। वह पहले और दूसरे विश्व युद्ध भी लड़े थे। मेजर गुरदीप ने डीएवी में पढ़ाई करने के बाद 1957 में आर्मी जॉइन की। 32 साल की सर्विस में उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ी। 1965 1971 में हुए पाकिस्तान के साथ युद्ध में सेवाएं दी। उनकी बहादुरी को देखते हुए 1986 में
उन्हें प्रेसिडेंट रहे ज्ञानी जैल सिंह ने अति विशिष्ठ सेवा मेडल से नवाजा। 1989 में जरनल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) 101 एरिया शिलांग (मेघालय) रहते हुए वह सेवामुक्त हुए। जनवरी 2017 में उनकी पत्नी जगदेश्वर कौर का देहांत हो गया था। वह अपने भाई महावीर सिंह तीन बेटियां इरा अरोड़ा, सुमीत सिंह मीरका सिंह के साथ रहते थे।






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