समाचार ब्यूरो
19/06/2017  :  10:15 HH:MM
जब प्रधानमंत्री ने ही नहीं दिया पार्टी उम्मीदवार का साथ
Total View  325

नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव में आम तौर पर सत्तारुढ़ दल का उम्मीदवार ही विजयी रहता है लेकिन एक ऐसा चुनाव भी था जिसमें प्रधानमंत्री ने ही अपनी पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया और उसे हार का सामना करना पड़ा था। यह रोचक चुनाव 1969 में हुआ था जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार वराह गिरि वेंकट गिरि सत्तारुढ़ कांग्रेस के उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी को मात देकर देश के राष्ट्रपति बने थे। अब तक का यह एक मात्र चुनाव है जिसमें पहले दौर की मतगणना में कोई भी उम्मीदवार जीत के लिये जरुरी मत हासिल नहीं कर सका था तथा दूसरी वरीयता के मतों की गणना तथा निचले क्रम के उम्मीदवारों को एक एक करके बाहर किये जाने के बाद चुनाव परिणाम का फैसला हो सका था। तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मई 1969 में मृत्यु हो जाने पर यह चुनाव कराना पड़ा था। देश के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राष्ट्रपति की उसके कार्यकाल के मध्य में ही मृत्यु हो गयी थी। तत्कालीन उपराष्ट्रपति वी वी गिरि कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे। उस समय तक उप राष्ट्रपति को राष्ट्रपति बनाने की एक परंपरा सी थी जो 1969 के चुनाव में टूट गयी।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   4322852
 
     
Related Links :-
पंजाब में गठबंधन पर केंद्रीय नेतृत्व निर्णय करेगा : अमरिंदर
नीतीश मेरे परिवार की हत्या कराना चाहते हैं : राबड़ी
हरियाणा में सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं : विपुल गोयल
कांगे्रसी नेताओं का बिगड़ रहा है मानसिक संतुलन : शर्मा
देश का छात्र हरियाणा में हर योजना का लाभ लेने में सक्षम
हुड्डा सरकार के 10 साल से ज्यादा हो रहा है काम
अकालियों ने किया कांग्रेस मुख्यालय का घेराव
अंत्योदय मिशन के तहत 1108 ग्राम सभाओं का चयन
‘स्टार्टअप इन्क्यूबेटर-कम-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ
राज्य सरकार की तैयारी पर सांसद सैनी का कड़ा विरोध