19/06/2017  :  10:16 HH:MM
70 स्कूलों में 20 से कम छात्रों पर दो से अधिक शिक्षक
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देहरादून उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षा की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ओर जहां पढऩे वाले बच्चों की संख्या घटने के मामले सामने आये हैं वहीं दूसरी ओर बहुत कम बच्चों अथवा छात्रों की संख्या पर दो से ज्यादा अध्यापक हैं। सूत्रों के अनुसार राज्य के अन्दर पिछले करीब डेढ़ दशक में प्राथमिक स्कूलों और मासूम विद्यार्थियों को शिक्षा देने में लापरवाही की गई वह किसी से भी छिपा हुआ नहीं है।
पहाड़ में कई प्राथमिक पाठशालाएं ऐसी हैं जिनमें काफी कम बच्चों पर दो या दो से अधिक अध्यापकों को तैनात किया गया तथा वहां की किसी भी दृष्टि से सरकार और शासन-प्रशासन ने सुध लेना गवारा ही नहीं समझा।हैरानी की बात यह है कि राज्य के अन्दर 77 विद्यालय ऐसे हैं जहां पर 20 से कम छात्र संख्या पर दो से अधिक शिक्षक तैनात हैं।आरटीई 2009 के मानक पर नजर डाली जाए तो प्राथमिक स्कूलों में 60 तक छात्र संख्या वाले स्कूलों में दो शिक्षक रखे जाते हैं, 61 से 90 तक की संख्या पर तीन शिक्षक, 91 से 120 तक पर चार शिक्षक, 121 से 150 पर पांच शिक्षक के साथ ही इससे अधिक की छात्र संख्या पर अधिक शिक्षक तैनात करने के मानक हैं।सरकार ने यह मान लिया है कि इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति, स्थानान्तरण, सेवानिवृत्ति आदि के कारण विद्यालयवार प्रतिवर्ष छात्रशिक्ष क का अनुपात प्रभावित होता रहता है। सूत्रों के अनुसार राज्य में इन पाठशालाओं की स्थिति ऐसी कही जा सकती है कि मौजूदा व्यवस्था से राज्य सरकार जहां सुधारात्मक कदम उठाने का समय नहीं निकाल पा रही है।हालांकि सूबे की नई सरकार ने इस दिशा में ठोस सकारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिये हैं।इस दिशा में सरकार की गंभीरता दिखाई भी दे रही हैं। सरकार कई प्राथमिक स्कूलों को बंद कराकर शेष स्कूलों में ही आवश्यकता के अनुसार गुरूजनों की तैनाती  कराने की दिशा में अपने कदम उठा रही है, ताकि मासूमों की शिक्षा एवं उनके भविष्य पर बेहतर ध्यान दिया जा सके।






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