समाचार ब्यूरो
16/07/2017  :  10:34 HH:MM
हिंदी भाई की कलाई पर नहीं बंधेगी चीनी भाई की बनाई राखी
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होशियारपुर चीन के साथ रिश्तों में आई खटास को लेकर इस बार भारतीय ग्राहक उसे सबक सिखाने की तैयारी कर चुका है। भारतीय त्यौहारों में अपना सामान बेचने वाले चीन को इस बार मुंह की खानी पड़ेगी। राखी के त्यौहार पर बाजारों में कई तरह की राखियां आई हैं पर ज्यादातर बाजारों में भारतीय राखी बेची जा रही है।
हिंदू एवं सामाजिक संगठनों के चीनी सामान के विरोध के चलते व्यापारियों ने बहुत कम चीन की राखी लाई है। शहर के घंटाघर चौक के पास राखियां बेचने वाले दुकानदार सुनीश जैन ने बताया कि चीनी राखी अन फीनिशड राखी आती है और यहां आकर राखियों की पैकिंग की जाती है। चाइनीज राखी सिर्फ बच्चों की रही है, जैसे म्यूजिक वाली या टेडीबियर वाली। चीनी राखी ज्यादातर बच्चों की आती हैं। चीनी राखी राखी की कीमत 10 से 100 रुपए तक है और इंडियन राखी की कीमत 10 से 350 रु तक। भारत में राखियों का मेन हब कोलकाता है। यहां पर 80 प्रतिशत राखी कोलकाता में बनती हैं। दुकानदार राजेश कुमार ने बताया कि चीन की आईटमों को लेकर विरोध हो रहा है। ऐसे में उसी माल को लाया है जो बिके ताकि आमदन ठीक रहे। ऊपर से यह भी भय है कि कहीं सोशल संगठन माल को जबरन फेंक दें। इसलिए भारतीय माल को ही तरजीह दी है। राखी भाई-बहन का पवित्र त्यौहार है और इसके लिए भारत में बनी राखी की अपनी अहमियत है।






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