समाचार ब्यूरो
19/09/2017  :  10:14 HH:MM
सरदार सरोवर का समर्पण
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आलोचकों ने कहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वहां विकास का कथानक प्रस्तुत करने के लिए नरेंद्र मोदी इतने बेसब्र हैं कि उन्होंने पितृपक्ष का भी ख्याल नहीं रखा। भारतीय जनता पार्टी को हिंदू मान्यताओं से चलने वाला दल समझा जाता है। मगर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की नींव श्राद्धकाल में डाली गई।

फिर इसी दौरान प्रधानमंत्री ने सरदार सरोवर बांध को राष्ट्र्र को समर्पित किया। कुछ समय पहले ही बांध की ऊंचाई बढ़ाकर 138.68 मीटर की गई थी। इससे इस्तेमाल हो सकने वाली बांध की जल क्षमता 4.73 एकड़ फुट (एमएएफ) हो जाएगी। इससे गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र्र के लोगों को फायदा होगा। गुजरात में पानी के अभाव से ग्रस्त क्षेत्रों में नर्मदा के पानी को नहर और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाएगा। इससे सिंचाई सुविधा में भी विस्तार होगा, जिससे 10 लाख किसानों फायदा पहुंचेगा। इससे चार करोड़ लोगों को पेय जल उपलब्ध कराना संभव होगा। प्रति वर्ष 100 करोड़ यूनिट पनबिजली पैदा होने की संभावना
बताई गई है। यानी फायदों का परिमाण बहुत बड़ा है।

भाजपा इसका श्रेय मोदी के दृढ़-संकल्प को देगी और आशा करेगी गुजरात के चुनाव में उसे इसका लाभ मिले। ऐसी उम्मीदें निराधार नहीं हैं। मगर बात को पूरे संदर्भ में देखें, तो सरदार सरोवर के इस स्थान तक पहुंचने का इतिहास लंबा है। इसका शिलान्यास 1961 में जवाहर लाल नेहरू ने किया था। राजीव गांधी सरकार ने इसके निर्माण को हरी झंडी दी। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल के दृढ़-निश्चय से परियोजना आगे बढ़ी। इस बीच विस्थापन और पुनर्वास के गंभीर प्रश्न उठे। भारत में इन मुद्दों पर सबसे लंबा और प्रभावशाली आंदोलन भी इसी परियोजना में चला। इससे इस मुद्दे ने अंतरराष्ट्र्रीय रूप लिया। विश्व बैंक से मिलने सहायता रुकी। न्यायपालिका ने विस्थापितों के पक्ष में बारबार हस्तक्षेप किया। उससे इस परियोजना को पूरा करना अपेक्षाकृत मुश्किल साबित हुआ। इसमें काफी समय बर्बाद हुआ। लेकिन आखिरकार गुजरात में ये परियोजना पूरी हो गई। मगर मध्य प्रदेश में अभी भी विस्थापन से जुड़े हुए सवाल कायम हैं। इन सवालों पर हुई बहस ने बड़ी विकास परियोजनाओं की जरूरत, उन्हें पूरा करने की रणनीति, विस्थापितों के अधिकार आदि को लेकर देश में एक नई समझ पैदा की है। भविष्य की परियोजनाएं इससे लाभावन्वित होंगी।






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