हरियाणा मेल ब्यूरो
20/09/2017  :  10:06 HH:MM
छोटे ऋण देने वाले संस्थानों के लिए नई आचार संहिता जारी
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मुंबई त्न छोटे ऋण देने वाले संस्थानों (माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस) के संगठन माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (एमएफआईएन) ने आज नयी आचार संहिता जारी की।इसके तहत गैर-निष्पादित परिसंपत्ति की समस्या से निपटने के लिए ऋण देने की कुछ शर्तें रखी गयी हैं।

रिजर्व बैंक के डिह्रश्वटी गवर्रर एन.एस. विश्वनाथन ने आज यहाँ एक कार्यक्रम में इस आचार संहिता को जारी किया।सिड्बी के उप प्रबंध निदेशक मनोज मित्तल भी इस मौके पर मौजूद थे।नयी आचार संहिता के अनुसार, यदि किसी उधारकर्ता ने तीन लघु ऋण दाताओं से ऋण ले रखा है तो उसे नया ऋण नहीं दिया जायेगा।साथ
ही संयुक्त उत्तरदायित्व समूह मॉडल पर किसी भी ऋणकर्ता को 60 हजार रुपये से अधिक का ऋण नहीं दिया जा सकेगा।यदि किसी ऋण की स्वीकृति देने से इस मॉडल के तहत कुल ऋण राशि 60 हजार से ज्यादा हो रही हो तो नया ऋण इस मॉडल की तहत मंजूर नहीं किया जा सकेगा।एमएफआईएन का कहना है कि ये उपाय गैरनिष्पादित परिसंपत्तियों का बोझ कम करने के उद्देश्य से किये गये हैं।एमएमआईएन की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे ऋण में सबसे ज्यादा योगदान अधिसूचित बैंकों का है। प्रत्यक्ष एवं बैंकिंग कॉरेस्पांडेंटों के जरिये दिये परोक्ष रूप से दिये गये ऋणों को शामिल करते हुये चालू वित्त की पहली तिमाही में माइक्रो फाइनेंस उद्योग का कारोबार 1,06,823 करोड़ रुपये का रहा।इसमें 36 प्रतिशत यानी 38,486 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी अधिसूचित बैंकों की रही।कुल 32,820 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी-माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही।छोटे ऋणों में पिछले साल शुरू किये गये लघु वित्त बैंकों की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की तीन प्रतिशत रही।






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