हरियाणा मेल ब्यूरो
28/09/2017  :  13:01 HH:MM
राहुल गांधी इतने अहम क्यों?
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भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में बेशक मुख्य एजेंडा आगामी चुनावों की तैयारी था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पार्टी नेतृत्व ने राहुल गांधी पर हमला बोलने को इस तैयारी की खास रणनीति बनाया। कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निशाना साधने की जिम्मेदारी खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने संभाली।
हाल की अमेरिका यात्रा के दौरान राहुल की उस टिह्रश्वपणी को जरिया बनाया, जिसमें कांग्रेस उपाध्यक्ष ने वंशवाद को भारतीय राजनीति, कारोबार और समाज की हकीकत बताया था। जब से राहुल ने ये भाषण दिया, भाजपा नेता इसे शर्मनाक और भारत का अपमान बता रहे हैं। आलोचना की इसी लाइन को अमित शाह ने आगे बढ़ाया। वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच फर्क को उभारने की कोशिश की। वर्तमान राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का जिक्र किया। कहा कि ये सभी अपनी प्रतिभा की बदौलत अपने पदों पर पहुंचे। इसमें अंतर्निहित था कि कांग्रेस में नेता वंशवाद के आधार पर आगे बढ़ते हैं। यानी संदेश देने की  कोशिश हुई कि सियासत की एक बुराई को वाजिब ठहराने का अनैतिक कार्य राहुल गांधी ने किया। मगर मुद्दा है कि एक ऐसा नेताजिसे भाजपा समर्थक समूह नाकाम और अयोग्य मानते हैं- अचानक सत्ताधारी दल की गणनाओं में इतना महत्त्वपूर्ण कैसे हो गया कि उसे ध्वस्त करना पार्टी को इतना अहम महसूस होने लगा? क्या यह अपनी सरकार के प्रदर्शन और उपलब्धियों में घटते भरोसे का परिणाम है? अनुभव यह है कि राजनीति में किसी नेता को लगातार आलोचना के केंद्र में रखना कई बार घाटे का सौदा होता है। इससे अनायस ही उस नेता को संबंधित पार्टी अपने विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश करती रहती है। खुद नरेंद्र मोदी ऐसी राजनीति से लाभान्वित नेताओं में रहे हैं। इसके बावजूद भाजपा राहुल गांधी को लगातार निशाने पर लेते हुए उन्हें चर्चा में रख रही है, तो यह विश्लेषण का विषय है कि क्या उसके पास अब कोई सकारात्मक या लोगों में सपने जगाने वाला एजेंडा बाकी नहीं रह गया है? कांग्रेस वैसे आज बहुत कमजोर स्थिति में नजर आती है। उसका प्रभाव क्षेत्र काफी घट चुका है। किसी बड़े गठबंधन की जमीन तैयार करने में भी अभी तक वह विफल है। इसके बावजूद भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में उसके नेता को मुख्य निशाना बनाया जा रहा हो, तो इसे सत्ताधारी दल के मन में बैठे किसी भय का संकेत ही समझा जाएगा।





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