समाचार ब्यूरो
01/10/2017  :  11:20 HH:MM
मूंदहू आंख कतहूं कछु नहीं!
Total View  386

पिता को बेटे ने जवाब दिया (चर्चा है कि दिलवाया गया)। यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के बारे में वे नहीं बोलेंगे, यह उनका अपने "राष्ट्रीय कर्त्तव्य" से चूकना होगा। तो अगले दिन उनके बेटे- केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने टाइम्स ऑफ इंडिया में लेख लिख कर जवाब दिया। जयंत सिन्हा के लेख का सार है कि सब ठीक-ठाक है। देश तेजी से प्रगति कर रहा है।

लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि निजी निवेश की दर क्यों नकारात्मक हो गई है। कंपनियों की कर्ज लेने की दर क्यों नहीं बढ़ रही। बिजली की मांग क्यों ठहरी हुई है। बुधवार को सियासी संकेतों से साफ था कि यशवंत सिन्हा के लेख से भाजपा खेमा आहत है। तो उसने तीन तरह से उसका जवाब तैयार किया। प्रवक्ताओं
को हरी-भरी आर्थिक तस्वीर पेश करने में लगाया गया, कोशिश हुई कि यशवंत सिन्हा के लेख पर मीडिया की चर्चा केंद्रित ना हो और सिन्हा के मकसद पर सवाल खड़े किए जाएं। हरी-भरी तस्वीर पेश करते हुए प्रवक्ताओं ने बताया कि किस तरह कारों की बिक्री बढ़ी है, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन माध्यमों से लाखों मोबाइल फोन बिक रहे हैं और मुद्रास्फीति कितने नियंत्रण में है। इस सबको देश में बढ़ती समृद्धि का संकेत बताया गया। लेकिन बेहतर यह होता कि भाजपा के कर्ता-धर्ता अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से संवाद करते।

मसलन, आगरा से आई एक खबर में भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं को यह कहते बताया गया है कि जमीन पर हालत बहुत खराब है, इसलिए आमजन से बेहतरीन सुर्खियों की चर्चा करना मुश्किल हो रहा है। दो साल पहले अरुण शौरी ने कहा था कि इस सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि आर्थिक सुर्खियों को संभालना है। सरकार के आर्थिक प्रदर्शन पर असंतोष जताने वालों में आगे चल कर सुब्रह्मण्यम स्वामी, एस. गुरुमूर्ति और यशवंत सिन्हा जैसे लोग भी शामिल हुए हैं। क्या इन सबको जवाब दिए जाने की जरूरत है? भाजपा आत्म-मंथन करे तो पाएगी कि ये उससे समर्थक हैं, लेकिन चाहते हैं कि सरकार सुधार के कदम उठाए। परंतु पार्टी और सरकार के नेतृत्व का नजरिया है कि हकीकत को सुर्खियों में ना आने दो- सब ठीक हो जाएगा! गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा था- मूंदहूं आंख कतहूं कछु नाहीं। मोदी सरकार ने ऐसा ही शुतुरमुर्गी रुख अपना लिया। इस हाल में ईश्वर से ही उसका और देश का भला करने की प्रार्थना की जा सकती है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   5793373
 
     
Related Links :-
राजस्थान : माहौल को भुनाने में लगी कांग्रेस
स्वेच्छा से आरक्षण का लाभ छोडऩे की भी पहल हो!
चौथे स्तंभ की ‘अकबर’ शैली
हर्ष और उल्लास का प्रतीक है दशहरा
सजा और सबक
शहादत में भेदभाव नहीं तो फिर नौकरी देने में भेदभाव क्यों ?
जो सवाल छोड़ गए अग्रवाल
लश्कर का खतरनाक एजेंडा
पारदर्शिता के पक्षधर जस्टिस रंजन गोगोइ
धार्मिक मामलों को आपसी सहमति से सुलझाना बेहतर होगा