25/11/2016  :  11:40 HH:MM
हवा में तैर रहे हैं जानलेवा बैक्टीरिया
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वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बीच प्रदूषित हवा के एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया के संवाहक होने के नये शोध ने वै ज्ञानिकों को गं भीर ङ्क्षचता में ड ाल दिया है । स्वीडेन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में प्रदूषित वातारवरण में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टरिया की उपस्थिति पायी है।

विश्वविद्यालय के सोग्रेंसेका एकेडमी में प्रोफेसर एवं सेन्टर फॉर एंटीबोयोटिक रेसिसटेंस रिसर्च के निदेशक जोकिम लार्सन ने‘यूनीवार्ता‘के साथ विशेष बातचीत में आज बताया कि उनकी टीम ने चीन की राजधानी बीङ्क्षजग की हवा के नमूने में ऐसे बैक्टीरिया के जीन के डीएनए पाये हैं जो एंटीबायटिक प्रतिरोधी हैं। प्रोफसर लार्सन ने कहा कि उनकी टीम ने इंसान और जानवरों के कुल 864 डीएनए और हवा के नमूनों का गहन अध्ययन किया । इस दौरान प्रदूषित हवा के नमूने में कई मिश्रित जीन मिले। प्रदूषित हवा में मौजूद बैक्टीरिया के जीन के डीएनए में उनके एंटिबायोटिक प्रतिरोधी होने की बात सामने आयी है । प्रोफेसर लार्सन ने कहा  Þङ्क्षचता यह है कि हमने प्रदूषित हवा के जिन नमूने की जांच की उसमें ऐसे कई जीन मिले हैं जो सबसे असरदार एंटीबायोटिक Þकारबपेनेम्स Þ के प्रतिरोधी हैं। यह एंटीबायोटिक दवा ऐसी बीमारी में दी जाती है जिसका इलाज प्राय: बहुत मुश्किल होता है। लेकिन हमने हवा के विस्तृत नमूने की जांच नहीं की है और एक सटीक नतीजे के लिए और विभिन्न देशों की प्रदूषित हवा के नमूनों की जांच करनी होगी। Þ उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी प्रदूषित हवा भारत समेत कई देशों की हो सकती है। प्रोफेसर जोकिब लार्सन ने कहाÞ हवा के नमूने में मौजूद जीन के डीएनए के हमारे परीक्षण से यह पता नहीं चल पाया है कि बैक्टीरिया जीवित हैं अथवा मृत। 

Þहालांकि प्रोफेसर लार्सन ने यह भी कहा कि हवा के पहले हुये अन्य परीक्षणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इसमें जीवित और मृत दोनों बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे बैक्टीरिया जीवत हैं तो हमारे लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है क्योंकि ये स्वस्थ्य व्यक्तियों को संक्रमित करेंगे। उन्होंने कहाÞ अभी हमने एक जगह की हवा के नमूने की जांच की है और इसके आधार पर हम किसी अंतिम नतीजे की घोषणा नहीं कर सकते।Þ बड़े पैमाने पर शोध के बाद अगर प्रदूषित हवा में ऐसे बैक्टीरिया की माजूदगी मिलती है तो हमें यह पहचान करना होगा कि किन कारणों से इस तरह के बैक्टीरिया हवा में तैर रहे हैं। प्रोफेसर लार्सन ने कहा Þ फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि हवा में इस तरह के बैक्टीरिया कहां से आते हैं। आशंका है कि इंसान के‘सूअरिज‘(मल) की वहज से हवा में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया पैदा हो रहे हों। यह जांच का विषय है।Þ

 यह पूछने पर कि अगर आपके शोध से यह बात साबित जो जाती है कि सूअरिज की वजह से हवा में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया पहुंच रहे हैं ,तो वैज्ञानिकों का अगला कदम क्या होगा, उन्होंने कहाÞ गंदे नालों और सूअरिज टैंकों को कारगर तरीके से ढक़ कर रखना इसके खिलाफ कारगर कदमों में से एक है।Þ हमारे यह पूछने पर कि गंदे नाले और ऐसे टैंक विकासशील देशों की समस्या हो सकती है लेकिन अमेरिका समेत अन्य विकसित देश तो इस श्रेणाी में नहीं आते उन्होंने कहा Þ नहीं ऐसी बात नहीं है। यह एक आम समस्या है । हमारे देश में भी यह‘बीमारी‘ है। Þ वर्ष 2007 में आंध्र प्रदेश के पटानचेरू फार्मास्युटिकल संयंत्र के कारण छह कुएं के पानी की जांच में एंटीबायोटिक सिप्रोफॉक्सिन और एंटिहिस्टामाइन सिट्रीजिन के सूक्ष्मतम कणों की पुष्टि करने वाले प्रोफेसर लार्सन ने कहा,Þ इसी आशंका के मद्देनजर शोध का हमारा अगला कदम यूरोप का सीवेज ट्रीममेंट ह्रश्वलांट है। हमें आशंका है कि कहीं ऐसे स्थानों के बैक्टीरिया हवा में तैर कर एक से दूसरे स्थान पर तो नहीं पहुंच रहे हैं जो  बायोटिक प्रतिरोधी हैं। Þ






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