हरियाणा मेल ब्यूरो
10/10/2017  :  09:22 HH:MM
हरियाणा फिर भी बेहतर है पूरी तस्वीर धुंधली क्यों?
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हरियाणा में लड़कियों को जन्म लेने से पहले भ्रूण में मार देने की समस्या, महिलाओं को लेकर रुढि़वादी विचार आदि सामाजिक मुद्दे हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं। लेकिन हाल फिलहाल की रिपोर्ट देखकर लगता है कि हरियाणा तो फिर भी बेहतर है देश की पूरी तस्वीर धुंधली क्यों है? भारत के नक्शे में देखिए पूरा बायां हिस्सा लाल निशान से रंगा नजर आएगा।
यानी इन क्षेत्रों में लड़कियों के जन्म लेने की औसत दर काफी कम है। ज्यादा चिंता की बात यह है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए चुने गए कई जिलों में बच्चियों के जन्म लेने की दर पहले से भी कम हो गई है। हरियाणा के दो जिले करनाल और सिरसा भी इनमें शामिल हैं। करनाल में लड़कियों के जन्म लेने की औसत दर पहले की तुलना में 29 कम हो गई और सिरसा में 30 की कमी हो गई। लेकिन उजला पक्ष यह है कि हरियाणा के 20 जिले अभियान के लिए चुने गए थे। उनमें से 18 में स्थिति सुधरी है। यह खुशी की बात है कि ज्यादातर जिलों में स्थिति बेहतर हुई है। हरियाणा जैसे राज्य में इस तरह का सुधार स्वाभाविक खुशी की वजह बनता है। क्योंकि यहां सामाजिक रूप से लड़कियों की स्थिति को लेकर तरह तरह के सवाल उठते रहे हैं। यहां यह उल्लेख जरूरी है कि हमारा हरियाणा लाडो की शान को लेकर लगातार आगे बढ़ रहा है। करनाल और सिरसा क्यों पीछे हैं इसकी पड़ताल करके आगे बढऩे का प्रयास करना होगा। हमें एक भी कलंक की वजह नहीं छोडऩा चाहिए। कन्या होने पर पूजा जैसी प्रथा हमने शुरू की है। इसे पूरे देश के लिए नजीर बनाने का प्रयास हमें करना होगा। हम ये करके दिखाएंगे। दुखद यह है कि देश के उन हिस्सों में तस्वीर धुंधली है जिन्हें ज्यादा प्रोग्रेसिव माना जाता रहा है। खासतौर पर देश की राजधानी दिल्ली का जिक्र करना चाहूंगा। दिल्ली के सात जिले अभियान के लिए चुने गए थे। इनमें से पांच का रिकार्ड खराब है। देश की राजधानी में यह स्थिति नहीं होनी चाहिए। अगर राजधानी में इस तरह का आंकड़ा होगा तो बाकी देश से क्या और क्यों उम्मीद हमारे हुक्मरानों को होनी चाहिए। यहां नीति बनाने वाले सारे नियंता मौजूद हैं। कहां गड़बड़ है यह पता करना होगा। एक बात साफ लगती है वह है हमारे राजनीतिक व प्रशासनिक नेतृत्व की इच्छाशक्ति में कमी। ब्यूरोक्रेसी अभी भी सवालों के घेरे में है। अगर ऐसा नहीं होता तो कम से कम दिल्ली में तो एक बड़ा अभियान चलाकर पूरे देश के सामने नजीर पेश की जा सकती थी। केवल नाम देकर अभियान शुरु करने से बात नहीं बनेगी हमें काम करके दिखाना होगा। उम्मीद है बेटियों को बचाने का काम रस्मी नही होगा। अलख जगाइए। लोगों को जागरूक कीजिये। महत्वपूर्ण स्थानों की स्वच्छता अभियान से भी बड़ा अभियान मन के भीतर बैठी गंदगी साफ करने के लिए चलना चाहिए।






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