17/10/2017  :  09:12 HH:MM
आओ मिलकर खुशियों का दिया जलाए
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दी पमालिका का पावन पर्व आ गया। अदालत के आदेश की वजह से दिल्ली एनसीआर में शायद पटाखों का शोर पहले जैसा नही सुनाई देगा। हमें मानना होगा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल पर पत्थर रखकर ये फैसला दिया होगा। निश्चित रूप से उन सभी लोगों को धक्का लगा होगा जो वर्ष भर इस पर्व का इंतजार करते हैं।

पटाखे हमारी परंपरा और संस्कृति से जुड़ गए हैं। तरह-तरह की आतिशबाजी केवल अपनी खुशी के इजहार के लिए ही नहीं होती। इसमें व्यापक संदेश भी निहित होता है। घर,समाज और देश में सुख,समृद्धि लाने का और दरिद्रता,विपन्नता को दूर करने का संदेश इस महान पवित्र पर्व में निहित होता है। मां लक्ष्मी की पूजा भी इसी भाव से होती है कि हर घर मे खुशियों का वास हो। लोग धन-धान्य से परिपूर्ण हों। स्वच्छता का वैज्ञानिक संदेश भी दीपमालिका के पावन पर्व में समाहित है। कहा जाता है जिस घर मे स्वच्छता होती है वहीं लक्ष्मी जी का वास होता है। आप देखिए दीवाली आते ही घरों का रंग रोगन शुरू हो जाता है। घर का हर कोना साफ किया जाता है। घर में जितना साफ सफाई होगी उतना वातावरण स्वच्छ होगा। बीमारियां दूर रहेंगी। सकारात्मक ऊर्जा का वास होगा। लेकिन दुर्भाग्य से पिछले कुछ सालों में देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में आवो हवा जिस तरह से खराब हुई है उसने हमारे त्योहारों पर ग्रहण लगा दिया है। हम घरों की साफ सफाई करते हैं लेकिन पूरा वातावरण शुद्ध हो इसकी चिंता शायद किसी को नही है। गाडिय़ों की बढ़ती संख्या, तमाम अन्य तरीकों से बढ़ता प्रदूषण जानलेवा हो गया है। हमारे नन्हें-मुन्हें बीमार पड़ रहे हैं। 90 फीसदी लोगों का फेफड़ा इस प्रदूषण से प्रभावित हुआ है। सांस की बीमारी बढ़ रही है। वातावरण में ऑक्सीजन की कमी से शरीर पर तरह तरह से प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

अगर पिछली दीवाली के बाद का हाल हम याद करें तो शायद दीवाली के पटाखों पर लगी रोक का दु:ख कुछ कम हो जाये। दीवाली के बाद एक हफ्ते तक लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया था। आंखों में जलन घुटन से लाखों लोग प्रभावित हुए थे। बीमार लोगों का हाल क्या हुआ होगा बताने की जरूरत नही। इसलिए इस त्योहार पर हमें नए सबक सीखने और आगे बढऩे की जरूरत है। विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है कि प्रदूषण रहित पटाखे बनाये जाएं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने पटाखों के रोक पर चिंता जाहिर की है। प्रदूषण रहित पटाखों को लेकर मंत्री का बयान और संघ की पटाखों पर लगी रोक पर चिंता को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। अगर प्रदूषण रहित पटाखे उपलब्ध होंगे तो हमें अपनी खुशी जाहिर करने, उमंग से त्यौहार मनाने का मौका भी मिलेगा। साथ ही संघ की चिंता को इस संदर्भ में देखना चाहिए कि नीति नियंताओं को कानूनविदों को पटाखों से होने वाले प्रदूषण की याद तब क्यों आई जब दिवाली दस्तक दे रही थी। क्या जिम्मेदार लोगों को पिछले साल हुई पीड़ा के बाद ये होश नही रहना चाहिए था कि अगली दिवाली भी आएगी। लोग धूमधाम से त्योहार मना सकें। उनकी खुशियों पर ग्रहण न लगे क्या इसकी तैयारी पहले से नही होनी चाहिए थी? लेकिन कौन बिल्ली के गले मे घंटी बांधे।

प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। लेकिन हमारे पास कोई योजना नही है। हम तात्कालिक फैसले करते हैं। लेकिन दीर्घकालिक रणनीति पर काम करने को तैयार नही हैं। राजनीति के चक्कर मे देश के भीतर अलग अलग दलों के प्रतिनिधि वक साथ बैठकर इस समस्या पर सोचने को तैयार नही। यही वजह है कि कुछ भी कारगर तरीके से नही हो पा रहा है और इसकी कीमत आम लोग चुका रहे हैं। खैर दीवाली सामने है। आम नागरिक के नाते हम कुछ संकल्प ले सकते हैं जिससे हमारे पर्व की खुशी दूनी हो जाये। पटाखों पर रोक लगी है लेकिन दीप पर्व पर खुशियों का दीपक जलाने से भला कौन रोक सकता है। कुम्हार से खरीदे हुए दिए घरों में जलाए। आसपास ऐसे लोगों के साथ दीवाली मनाने का ह्रश्वलान बनाये जिन्हें भगवान ने आप जैसा खुशनसीब नही बनाया है। मिठाई और दियों का पैकेट उनको भेंट करें जो अभाव भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। दिया इस तरह से जलाएं कि वह रात भर जगमगाता रहे। इस संदेश के साथ... लाख बंदिशें हों मगर ये हौंसलों का दिया है जलता ही रहेगा। हम प्रदूषण मुक्त भारत की मुहिम में कुछ त्याग करेंगे तो लक्ष्मी की कृपा हम पर जरूर होगी इसी पक्के भरोसे और इरादे के साथ आओ मिलकर खुशियों का दिया जलाएं। -शुभ दीपावली






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