हरियाणा मेल ब्यूरो
10/11/2017  :  13:56 HH:MM
नोटबंदी और जीएसटी के दर्द को भुलाने आ गई ‘बेनामी’...?
Total View  161

प्र धानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक साल पहले 8 नवंबर को घोषित नोटबंदी के दर्द से जो लोग कराह रहे हैं और उनसे अब दर्द सहा नहीं जा रहा है तो बता दें कि उन्हें उससे छुटकारा दिलाने के लिए एक और बड़ा दर्द मिल सकता है ताकि वो पुराने हो चले दर्द को भुला सकें। इसी प्रकार जीएसटी लागू करने से जिन व्यापारियों और उपभोक्ताओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है और वो समझते हैं कि इससे बड़ा कोई दर्द उन्हें जीवन में मिल ही नहीं सकता तो ऐसे लोगों को भी एक बड़ा दर्द देने का इंतजाम कर लिया गया है, इसका नाम ही बेनामी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई है।
दरअसल देश में बेनामी संपत्तियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। ऐसे में अब सरकार विरोधियों ने इस पर भी निशाना साधना शुरु कर दिया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा का कहना है कि आयकर विभाग अब तक 1,833 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्तियों को जब्त करने में सफलता हासिल कर चुका है। वैसे देखा जाए तो यह आंकड़ा चौंकाने वाला नहीं है, क्योंकि ऐसी संपत्तियों का आंकड़ा खरबों में जाना चाहिए, क्योंकि कालाधन मामले में भी आम चुनाव के पूर्व भाजपा और उससे जुड़े चुनाव प्रचारकों ने ऐसा ही कहा था। बहरहाल चंद्रा आगे भी कार्रवाई जारी रखने का भरोसा दिलाते हैं और कहते हैं कि इस तरह की बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जाना अब जरुरी हो गया है। ऐसे में आम लोगों को समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर यह बेनामी संपत्ति है क्या और अचानक 2015 में ही इसका ख्याल मोदी सरकार को ही क्योंकर आया? क्या इससे पहले बेनामी संपत्ति वाला कोई कानून था ही नहीं और यदि था तो क्या लोग इतने ईमानदार थे कि उन्हें आवश्यकता ही नहीं थी इस तरह के काले कारनामें करते और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या महज दो-तीन सालों में मोदी सरकार के समय लोग इतने भ्रष्ट हो गए कि उन्हें बेनामी संपत्ति रखने से रोकने के लिए अचानक यह व्यवस्था करनी पड़ गई? ऐसे तमाम सवालों के जवाब में बताया जा सकता है कि बेनामी लेनदेन पर रोक लगाने के लिए पूर्व सरकार ने बेनामी लेनदन (पाबंदी) अधिनियम 1988 पारित किया था। इसके तहत बेनामी लेनदेन करने पर तीन साल की जेल और जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। अब सवाल यह है कि जब यह व्यवस्था थी तो फिर नए सिरे से इसे लागू करने जैसा क्यों प्रचारित किया जा रहा है? आपको बतला दें कि केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार ने 2015 में इस कानून में संशोधन किया जिसके तहत सजा की मियाद बढ़ाकर सात साल कर दी गई और जो लोग जानबूझकर गलत सूचना देते हैं उन पर प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का 10 फीसदी तक जुर्माना देना सुनिश्चित किया गया।

इस प्रकार सरकार ने कानून में संशोधन कर ऐसा प्रचारित किया मानों उसने ही इसे बनाया और लागू करवाया है, जबकि पूर्व से ही कानून लागू है। यह अलग बात है कि पूर्व में किसी सरकार ने इसका सियासी लाभ भी नहीं लिया और न ही राजनीतिक विद्वेषवश किसी को ‘बेनामी’ के नाम पर परेशान ही किया। ऐसे में  जूदा
सरकार ने अपनी मुद्रा हंटर चलाने वाले की तरह क्यों रखी और इन्हें भरोसा क्यों दिलाया कि धार्मिक ट्रस्ट इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे? दरअसल मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून घरेलू ब्लैक मनी खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में लगे काले धन की जांच के लिए लाया गया है। इसके साथ ही जानकारों ने बताया
कि पत्नी, बच्चे, माता-पिता के नाम पर खरीदी गई संपत्त‍ि और आय के घोषित स्रोत के जरिये चुकाई गई राशि बेनामी संपत्त ‍ि के दायरे में नहीं आती है। इस प्रकार भाई, बहन, पत्नी या बच्चों के नाम से खरीदी गई ज्वाइंट प्रॉपर्टी जो आय के ज्ञात स्रोतों से खरीदी गई है और जिस लेनदेन में एक ट्रस्टी और लाभार्थी शामिल हो,
वह प्रॉपर्टी बेनामी संपत्त‍ि में शामिल नहीं होती है। यह तो कानून और उसके दायरे की बात है, लेकिन यह सभी जानते हैं कि यह हिन्दुस्तान है जहां कानून के पालन होने या नहीं होने के मामले में दोहरी व्यवस्था है, अर्थात् आरोप लगने पर ही कुछ लोगों को सीधे जेल पहुंचा दिया जाता है या फिर उसे महत्वपूर्ण पद से हटा दिया
जाता है और ऐसा करते हुए अदालत के फैसले का इंतजार तक नहीं किया जाता, जबकि दूसरी व्यवस्था के तहत कुछ लोगों पर आरोप सिद्ध होने के बाद भी सिर पर से ताज नहीं उतरता, बल्कि वह और शान से राज करता नजर आता है। सवाल उठने पर जवाब दिया जाता है कि मामला अदालत में विचाराधीन है ऐसे में कोई
टीका-टिह्रश्वपणी नहीं होनी चाहिए। अब ऐसे माहौल में जिस व्यक्ति या संस्था पर बेनामी संपत्ति से संबंधित जांच या कार्रवाई होती है वह उचित थी या नहीं इसे साबित करने में ही वर्षों निकल जाएंगे। इसलिए कोई भी इसके चक्कर में पडऩा नहीं चाहता है। बहरहाल मोदी सरकार ने कानून में संशोधन के साथ ही करीब 2सौ टीमों का गठन कर देशभर में बेनामी संपत्तियों की जांच का काम उन्हें सौंप दिया। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि ऐसे लोगों पर जल्द ही कार्रवाई हो सकती है जो सरकार विरोधी बयानों के जरिए उसे लगातार निशाने पर रखते हैं। चूंकि यह काम संपन्न  और समृद्ध लोगों के द्वारा ही किया जाता है अत: उन्हें ही इस ‘बेनामी’ से ज्यादा खतरा नजर आ रहा है, अब देखना यह है कि इस कार्रवाई में कितनी ईमानदारी बरती जाती है, क्योंकि सरकार से जुड़े अनेक लोग दो-तीन सालों में ही धनवान हो अनेक कीमती संपत्तियों के मालिक बन बैठे हैं, ऐसे में उन पर भी इनकी निगाह जाती है या नहीं यह देखने वाली बात होगी।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   9738894
 
     
Related Links :-
गंगा स्वच्छता अभियान की झोली में 5 बिलियन डॉलर
अब अपने ऊपर भरोसा
सियांग नदी के प्रदूषण से उभरा चीन का चेहरा!
कांग्रेस के लिए भस्मासुर साबित होते ये नेता
वाणी दोष से पीडि़त हैं मणिशंकर
अयोध्या : अभी मौका है
राहुल गांधी के सर कांटों का ताज
वादा था भूगोल बदलने का; बदला जा रहा है इतिहास......?
चाबहार का रणनीतिक रास्ता
देश में रोजाना सैकडों आत्महत्या क्यों?